बार-बार रेल दुर्घटनाएं, अफसरों का ध्यान 300 शाही बोगियों की सुविधाओं पर

| September 4, 2017

हाल ही में तीन बड़ी रेल दुर्घटनाएं हुईं हैं। रेल यात्रियों को जनरल फैसेलिटी तक नहीं हैं।

हाल ही में तीन बड़ी रेल दुर्घटनाएं हुईं हैं। रेल यात्रियों को जनरल फैसेलिटी तक नहीं हैं। रेलवे के अफसरों का ध्यान इस बात पर है कि ब्रिटिश काल से मिल रही सुविधाएं कम न हो जाएं। सीनियर अफसर अभी भी सलून कार (शाही बोगी) का इस्तेमाल कर रहे हैं। 2015- 2016 में इन सलून पर 260 करोड़ रुपए खर्च हुआ। जबकि 2016-17 में खर्च 282 करोड़ रुपए हो गया। कुल 314 ऐसे शाही सलून हैं। इनमें से 300 सलून इस्तेमाल किए जाते हैं। अगर ये 300 शाही बोगियां जोड़ दी जाएं तो 15 रेल बन सकती हैं।




– अफसर लोकल निरीक्षण तथा पटरी के निरीक्षण के नाम पर सलून से सफर करते हैं। पिछले साल नॉर्थ रेलवे झोन में वाराणसी में विश्वेश्वर के दर्शन के लिए साल में 176 बार अफसरों द्वारा सलून का इस्तेमाल हुआ। रेल मंत्री भी इसमें पीछे नहीं हैं। लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में दिल्ली से पटना के लिए 369 बार सलून से सफर हुआ।




– ममता बनर्जी के कार्यकाल में सलून का सबसे कम इस्तेमाल हुआ। रेलवे बोर्ड नई दिल्ली यात्री सेवा समिति के सदस्य डाॅ. अशोक त्रिपाठी ने बताया कि रेलवे में 1927 से सलून कार की व्यवस्था है। डीआरएम और जीएम तथा बोर्ड सदस्यों के लिए ये सलून कार अारक्षित रहते हैं। एसएजी दर्जे के अफसर को सलून के लिए संबंधित अफसर की इजाजत लेनी पड़ती है।
– इस सलून कार का आधिकारिक नाम है, निरीक्षण कार। लेकिन 90 फीसदी सलून का इस्तेमाल अफसर अपने परिवार के साथ सफर करने के लिए ही करते हैं। ब्रिटिश काल में ब्रिटिश अफसर खुद को भारतीयों से अलग दिखाने के लिए इसी सलून का उपयोग करते थे। यह बोगी पूरी तरह से एयर कंडिशंड होती है।








ये सुविधाएं होती हैं…
– इसमें दो बेडरूम, डायनिंग रूम, किचन, टॉयलेट और एक गैलरी होती है। साथ ही टीवी, फ्रिज जैसी सुविधाएं भी होती हैं। अफसर की सेवा में चार कर्मचारी और व्हेज-नाॅन वेज खाना पकाने के लिए दो कूक होते हैं। असिस्टेंट के लिए अलग जगह होती है। वे कहते हैं कि सलून बोगी का इस्तेमाल कर नई रेल बनाई जा सकती है। अगर ऐसा किया जाए तो इससे 15 खास रेल बनेंगी। वे कहते हैं कि रेलवे का यह ब्रिटिश राज जल्दी बंद होना चाहिए। विगत साल इसी संदर्भ का आवेदन रेल मंत्री को दिया गया है।
– जबकि इस मामले में रेलवे बोर्ड नई दिल्ली के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अनिलकुमार सक्सेना का कहना है कि सलून का इस्तेमाल चेकिंग के लिए होता है। यह वीआईपी कल्चर नहीं है। सलून बंद करने के बारे में अभी कुछ भी फैसला नहीं हुआ है।

Category: Indian Railways, News

About the Author ()

Comments are closed.