अब कोटे के अंदर कोटा, मोदी सरकार का आरक्षण पर नया फार्मूला

| August 24, 2017

मोदी सरकार ने बुधवार को अहम फैसले में ओबीसी के लिए क्रीमी लेयर की उच्चतम सीमा 2 लाख रुपये बढ़ा दी, वहीं ओबीसी जातियों के बीच सब-कैटिगरी बनाने की भी पहल कर दी। पीएम की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इसके लिए आयोग बनाने को मंजूरी दी गई। आयोग 12 महीने में रिपोर्ट देगा, जिसके बाद सब-कैटिगरी में आने वाली जातियों के आरक्षण को अलग-अलग भागों में बांटा जा सकता है। सरकार का दावा है कि ओबीसी के अंदर सब-कैटिगरी बनाने से ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों को आरक्षण मिल सकेगा। बिहार सहित 9 राज्य ऐसा कर चुके हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि आरक्षण पर पुनर्विचार का सरकार का कोई इरादा नहीं है। अनुसूचित जातियों के लिए सब-कैटिगरी बनाने के विचार से भी सरकार ने इनकार किया। एक अन्य फैसले में मोदी सरकार ने नौकरियों में ओबीसी के लिए क्रीमी लेयर की उच्चतम सीमा बढ़ाकर आठ लाख रुपये सालाना कर दी है। पहले यह सीमा छह लाख थी। मतलब अब सालाना आठ लाख रुपये तक कमाने वाले ओबीसी परिवारों के स्टूडेंट भी आरक्षण का फायदा ले पाएंगे।








एक सरकारी कमिटी ने पिछले दिनों ओबीसी को तीन श्रेणियों में बांटने की सिफारिश की थी। हाल में पिछड़ी जातियों को एकजुट कर सपोर्ट पाने में सफल रही बीजेपी अब इस पर आगे बढ़ना चाहती है।

• मंडल कमिशन के बाद ओबीसी को 27% आरक्षण मिलता है। इनमें अधिकतर जातियों का कहना है कि 27% कोटे में उनका हिस्सा ना के बराबर होता है, मुट्ठी भर जातियां ही इसका लाभ लेती हैं।• ओबीसी के अंदर नई कैटिगरी की तैयारी पीएम और बीजेपी अध्यक्ष की सोशल इंजीनियरिंग का हिस्सा है। इसका बड़ा राजनीतिक असर होगा। जानकार इस आयोग के गठन को मंडल पार्ट-2 मान रहे हैं।




एक साथ कई निशाने लगाने की केंद्र सरकार की कोशिश, मंडल 2.0 : नई सोशल इंजिनियरिंग

मोदी सरकार का दावा है कि ओबीसी में अलग श्रेणी बनाने का लाभ सभी जातियों को मिलेगा। हर जाति को नौकरियों में हिस्सा मिलेगा। मालूम हो कि मंडल कमिशन लागू होने के बाद ओबीसी को सरकारी नौकरियों में 27 फीसदी आरक्षण मिलता है, लेकिन पिछले दिनों एक रिपोर्ट सामने आई, जिसमें कहा गया कि केंद्रीय कर्मचारियों में मात्र 12 फीसदी ओबीसी हैं। इनमें भी अधिकांश लाभ इनकी मजबूत जातियों को ही मिला है। अब सरकार इन ओबीसी को 3 श्रेणियों में बांटेगी। तीनों के बीच 27 फीसदी के आरक्षण को उनके प्रतिनिधित्व के हिसाब से बांटा जाएगा।
मोदी सरकार ने बुधवार को ओबीसी की नई श्रेणी गठित करने के लिए आयोग बनाने का फैसला लिया। इस फैसले का व्यापक राजनीतिक असर होगा। यह पीएम मोदी और अमित शाह की सोशल इंजिनियरिंग का मेगा प्लान है। जानकार इस आयोग के गठन को मंडल पार्ट 2 भी मान रहे हैं। जानते हैं, इस फैसले का बड़ा राजनीतिक असर कैसे होगा/




यूपी फॉर्म्युला पर आगे बढ़ने का संदेश : बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में मायावती और अखिलेश यादव से निबटने के लिए सोशल इंजिनियरिंग की थी। गैर यादव समेत सभी पिछड़ी जातियों को एकजुट करने में बीजेपी ने पूरी ताकत लगाई। इसमें पार्टी को भरपूर सफलता भी मिली। बीजेपी ने इन जातियों से लगभग डेढ़ सौ सीटों पर टिकट दिए। बीजेपी की बड़ी जीत में गैर यादव और पिछड़ी जातियों के ध्रुवीकरण को सबसे बड़ा कारण माना गया।

अब बिहार में मिलेगा बड़ा लाभ

यूपी के अलावा देश के अधिकतर बड़े राज्यों में इन्हीं पिछड़ी जातियों की तादाद सबसे अधिक है। ऐसे में बीजेपी अब यूपी फॉर्म्युले को देश के सभी राज्यों और 2019 आम चुनाव में भी अपनाना चाहती है। बिहार में इस फॉर्म्युले में सबसे बड़े बाधक नीतीश कुमार थे, लेकिन अब जबकि वह खुद एनडीए का हिस्सा है तो बीजेपी को बिहार में इससे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। नीतीश ने बिहार में ओबीसी को अलग-अलग श्रेणी में बांटने की पहल की थी। उन्होंने महादलित की श्रेणी भी बनाई, जो बाद में उनका बड़ा वोट बैंक बनी। बिहार में नीतीश ने गैर यादव पिछड़ी जातियों को एकजुट कर लालू को राजनीति में हाशिए पर ला दिया था, लेकिन 2015 में नीतीश के लालू के हाथ मिलाने के बाद भी बीजेपी इसमें सेंध नहीं लगा सकी। अब आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में मोदी सरकार ओबीसी की नई श्रेणी बनाकर इसका पूरा राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर सकती है।

एक जात बनाम सब जात : अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी ने अलग तरह की सोशल इंजिनियरिंग की थी। झारखंड में गैर आदिवासी, हरियाणा में गैर ब्राह्मण, महाराष्ट्र में ब्राह्मण को सीएम बनाकर उन्होंने मौजूदा राजनीतिक ट्रेंड को बदलने का संदेश दिया, जिसका लाभ भी मिला।

लेकिन चुनौतियां भी हैं : सब कुछ इतना आसान भी नहीं होगा। मोदी सरकार की ओर से प्रक्रिया शुरू होने के बाद इन अलग-अलग श्रेणियों में शामिल हर जाति ज्यादा से ज्यादा लाभ लेने का दावा जाति पेश करेगी। ऐसे में सबको खुश रखना सरकार के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है। वहीं, ओबीसी को अलग-अलग श्रेणी में बांटने के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए पासवान ने कहा कि मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि आरक्षण की मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं होगा।

quota in quota fb

Category: News

About the Author ()

Comments are closed.