Big Slackness on the part of Railway Board at the time of Train Accident

| August 24, 2017

हादसे से दो घंटे तक बेखबर रहे रेलवे बोर्ड के अफसर

कानपुर : कैफियत एक्सप्रेस के पटरी से उतरने के बाद ट्रेनों के संचालन और यात्री सुरक्षा पर पैनी नजर रखने के रेलवे के दावे की पोल बुधवार सुबह खुल गई। कानपुर-इटावा सेक्शन पर सुबह 2:50 बजे एक्सिडेंट हुआ और रेलवे बोर्ड को इसकी जानकारी सुबह 4:45 बजे तब हुई, जब कानपुर में ‘एनबीटी’ से संपर्क किया गया। ‘एनबीटी’ ने ही सबसे पहले बुधवार तड़के हादसे की खबर ब्रेक की थी।

दिल्ली-हावड़ा रेल रूट को देश की लाइफ-लाइन माना जाता है। दिल्ली के बाद रूट के सबसे बड़े स्टेशन कानपुर सेंट्रल और इटावा के बीच सुबह 2:50 बजे कैफियत एक्सप्रेस पटरी से उतर गई। इलाहाबाद डिविजन हेडक्वॉर्टर के अलावा कानपुर और टुंडला से एक्सिडेंट








रिलीफ ट्रेनें रवाना की गईं। इलाहाबाद में रेलवे अफसरों ने हादसे की पुष्टि कर दी।

‘एनबीटी’ ने सबसे पहले एक्सिडेंट की खबर वेबसाइट पर देने के बाद इसे अपने ट्विटर हैंडल से सुबह 3:45 बजे ट्वीट किया। 9 मिनट बाद मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे के ट्विटर हैंडल से रिपोर्टर का नंबर मांगा गया। ‘एनबीटी’ ने 18 मिनट बाद 4:03 बजे 10 कोच डिरेल होने की जानकारी ट्वीट की। 10 मिनट बाद 4:13 बजे रेलवे ने दोबारा रिपोर्टर का नंबर मांगा। नंबर देने के बाद 4:18 बजे दिल्ली के लैंडलाइन नंबर से आए कॉल पर पूरे हादसे की जानकारी मांगी गई। कॉलर को यह तक नहीं पता था कि हादसा किस पॉइंट पर हुआ है और कितने कोच डिरेल हुए हैं। इसके कुछ देर बाद 4:46 बजे रेलवे बोर्ड से संबंधित शख्स ने अपने मोबाइल नंबर से कॉल कर पूरी घटना की जानकारी मांगी। साथ ही कुछ लोकल पत्रकारों के नंबर भी मांगे, ताकि घटना का पूरा विवरण लिया जा सके। इसके बाद उन्हें एक नंबर दिया गया। सुबह 6:12 बजे मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे के ट्विटर हैंडल से घटना की पहली जानकारी ट्वीट की गई। इससे साफ है कि दिल्ली में बैठे रेलवे बोर्ड के सीनियर अधिकारी भी दो घंटे तक घटना से पूरी तरह बेखबर थे।•प्रमुख संवाददाता, कानपुर




कैफियत एक्सप्रेस डिरेल होने के कारणों के बारे में साफतौर पर बात करने से भले ही रेलवे बच रहा है, लेकिन आसपास के लोग और सबूत कुछ अलग ही इशारा कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, घटनास्थल के करीब ही डेडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) का काम चल रहा था। रेलवे के ठेकेदार दिन में यहां काम कराते थे, तो रात में आसपास के खेतों और रेल लाइन के किनारे से मिट्टी की अवैध माइनिंग होती थी। अवैध खनन के चक्कर में ही डंपर ट्रैक पर फंसा और हादसा हुआ।

एक हफ्ते पहले बचा था हादसा : सूत्रों के मुताबिक, डीएफसी के लिए दिन में रेलवे के ठेकेदार काम करते थे। लोकल पुलिस-प्रशासन की मदद से कॉन्ट्रैक्टर रेल लाइन के किनारे खेतों से मिट्टी की अवैध माइनिंग करा रहा था। एक्सिडेंट साइट पर एक जगह मिली मिट्टी इस बात की गवाही दे रही है। वैसे भी लंबे समय से कानपुर और आसपास के इलाकों में रेलवे प्रॉजेक्ट्स में अवैध माइनिंग की मौरंग, बालू और मिट्टी के इस्तेमाल की शिकायतें आती रही हैं। इसके अलावा एक हफ्ते पहले अछल्दा में रेलवे क्रॉसिंग पर ईंटों से लदा एक ट्रैक्टर फंस गया था।




इसे किसी तरह निकाला गया था। इस मामले में पुलिस ने केदारनाथ नाम के शख्स के खिलाफ रिपोर्ट भी लिखी है। हालांकि आरपीएफ ने बाद में मामला रफा-दफा कर दिया था। डंपर से हुए हादसे के बारे में दो तरह की बातें सामने आ रही हैं। पहला तर्क है कि बालू भरा डंपर ट्रैक के करीब मिट्टी में धंस गया। डंपर ड्राइवर भाग निकला और उसने रेलवे को कोई सूचना नहीं दी। दूसरा तर्क दिया जा रहा है कि मानवरहित क्रॉसिंग पर ट्रैक क्रॉस करने के दौरान डंपर फंस गया। ट्रेन आती देख ड्राइवर भाग निकला और हादसा हो गया।

हालांकि नॉर्थ सेंट्रल रेलवे के सीपीआरओ गौरव कृष्ण बंसल ने पहले तर्क को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि एक्सिडेंट के कुछ देर पहले अप लाइन से संगम और डाउन लाइन से प्रयागराज एक्सप्रेस गुजरी थी। वहां ट्रैक के किनारे अगर कोई डंपर दिखता तो ड्राइवर तुरंत कंट्रोलर को इसकी सूचना देते।

लेकिन ऐसी कोई शिकायत नहीं आई। इसका मतलब साफ है कि डंपर वहां से गुजर रहा था। ट्रेन के इंजन से डंपर के अगले हिस्से को ही टक्कर लगी है। दूसरी तरफ ट्रेन ड्राइवर एसके चौहान के मुताबिक, ट्रैक के बगल में काम की उनको कोई सूचना नहीं मिली थी। हादसे में चौहान भी जख्मी हुए हैं।

TWO HOURS ST

Category: Indian Railways, News, Uncategorized

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