Railway issues detailed description of its works towards preventing accidents

| August 23, 2017

अभूतपूर्व उपायों से रेल हादसों में आई कमी, रेल मंत्रलय ने पिछले तीन वर्षो में सरकार द्वारा दुर्घटना रोकने के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा जारी किया, सरकार का दावा, चार सालों में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च हुए चार लाख करोड़

भले ही बीच-बीच में कुछ दुखद हादसे हो जाते हों, लेकिन कुल मिलाकर देश में रेल दुर्घटनाएं कम हुई हैं। पिछले तीन वर्षो में सरकार द्वारा दुर्घटना रोकने के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा जारी किया है। इनमें 2017-18 के बजट में एक लाख करोड़ रुपये के राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष का एलान शामिल है। 1रेल मंत्रलय के मुताबिक तीन वर्षों में जानमाल के नुकसान वाली ट्रेन दुर्घटनाओं में क्रमश: कमी आई है। जहां 2014-15 और 2015-16 में इनकी संख्या क्रमश: 135 और 107 थी, वहीं 2016-17 में केवल 104 दुर्घटनाएं हुईं। यही नहीं, प्रति दस लाख ट्रेन किलोमीटर पर होने वाली दुर्घटनाओं का आंकड़ा भी घटकर क्रमश: 0.11, 0.10 तथा 0.9 हो गया है। सबसे ज्यादा गिरावट चौकीदार रहित रेलवे क्रासिंग पर होने वाले हादसों में हुई है जिसमें 2014-15 के मुकाबले 2016-17 में फीसद की कमी आई है। यही नहीं, पहले जहां चौकीदार युक्त क्रासिंग पर सालाना छह हादसे होते थे, वहीं अब कोई हादसा नहीं होता।








क्रासिंग का खात्मा : 2015-16 के रेल बजट में सरकार ने 3-4 वर्षो में चौकीदार रहित क्रासिंग समाप्त करने का एलान किया था। इसके तहत 2016-17 में 15 ऐसी क्रासिंग या तो बंद कर दी गईं या वहां ओवरब्रिज या अंडरब्रिज बना दिए गए। इससे पहले 2015-16 में 1253 तथा 2014-15 में 1148 चौकीदार रहित क्रासिंग खत्म की गई थीं। इसी तरह कई स्थानों पर चौकीदार युक्त क्रासिंग भी समाप्त की जा रही हैं। 2016-17 में 509, 2015-16 में 390 तथा 2014-15 में 310 चौकीदार युक्त क्रासिंग को खत्म किया गया। तकनीकी सुधार : हादसे रोकने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी एवं उपकरणों का उपयोग भी बढ़ाया जा रहा है। मसलन, ट्रेनों की टक्कर रोकने के लिए लोको पायलटों को ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम की मदद प्रदान की जा रही है। सर्वाधिक व्यस्त रूटों से इसकी शुरुआत की गई है। इसके अलावा लोको पायलटों को अब सिमुलेटर पर ट्रेन चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।




पटरी से उतरने (डिरेलमेंट) के हादसों पर लगाम लगाने के लिए मशीनों के जरिये ट्रैक की जांच और रखरखाव के उपाय किए जा रहे हैं। इनमें अल्ट्रासोनिक फॉल्ट डिटेक्शन (यूएसएफडी) मशीनें प्रमुख हैं। हेड ज्यादा कठोर (हेड हार्डेड) रेल के अलावा उन्नत वेल्डिंग तकनीक में भी सुधार किया गया है। आइसीएफ बोगियों के बजाय अब केवल एलएचबी बोगियों का उत्पादन किया जा रहा है, जो ज्यादा सुरक्षित हैं। जबकि पुरानी आइसीएफ बोगियों को सुरक्षित बनाने के लिए एलएचबी वाली सीबीसी कपलिंग लगाई जा रही हैं। आग से सुरक्षा के लिए फायर रिटार्टेड मैटीरियल के अलावा पैंट्री कारों में ऑटोमैटिक फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम का प्रयोग होने लगा है। 1आमतौर पर माना जाता है कि रेलवे अपने फंड का इस्तेमाल बुलेट ट्रेन जैसी फैंसी परियोजनाओं पर खर्च करता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि रेलवे अभी भी गरीबों के हित में काम कर रही है। आज की तारीख में भारत में रेल किराया दुनिया में सबसे कम है और रेलवे अभी भी यात्री किरायों और उपनगरीय रेलों पर सालाना 300 करोड़ रुपये की सब्सिडी राशि खर्च करता है।

रेलवे ने पिछले चार सालों में सुधारों के जरिये उपलब्धियों का नया इतिहास रचा है। इस दौरान बुनियादी ढांचे के निर्माण पर लगभग चार लाख करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई। यह नया रिकार्ड है। इससे पहले आजादी के बाद के तमाम वर्षो में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर कुल मिलाकर 4.9 लाख करोड़ रुपये की राशि खर्च हुई थी।1पिछले तीन सालों में नई लाइनों, दोहरीकरण, सामान परिवर्तन तथा विद्युतीकरण के नए रिकार्ड कायम हुए हैं। पिछले तीन सालों में 12690 किलोमीटर दोहरीकरण के कार्य स्वीकृत हुए तथा 4378 किलोमीटर लाइनों का दोहरीकरण हुआ। इसके मुकाबले पिछले तीस वर्षो में सब मिलाकर 7192 किलोमीटर दोहरीकरण के कार्य संपन्न हुए थे। 16700 किलोमीटर विद्युतीकरण के कार्य स्वीकृत हुए जबकि 9000 किलोमीटर लाइनों का विद्युतीकरण पूरा किया गया। 1काकोडकर समिति के सुझाव लागू1रेलवे संरक्षा पर गठित डॉ. अनिल काकोडकर समिति ने 106 सुझाव दिए थे।




इनमें से 68 को पूरी तरह तथा 13 को आंशिक रूप से स्वीकार किया गया है। इनमें से 52 सुझावों को लागू किया जा चुका है जबकि बाकी लागू हो रहे हैं।दोषियों को सजा 1मंत्रलय के मुताबिक बीते चार वर्षों में 464 रेल दुर्घटनाओं के लिए 662 रेलकर्मियों को कुसूरवार ठहराया गया। इनमें से 147 को बर्खास्त तथा 28 को रिटायर किया गया। इसके अलावा 191 कर्मचारियों की प्रोन्नति रोकी गई तथा बाकी पर विभिन्न प्रकार की पेनाल्टी लगाई गई।फीसद हादसे घटे चौकीदार रहित क्रॉसिंग परसाल में हादसों की संख्या 135 से घटकर 104 रह गईखानपान 1खानपान के लिए नई नीति लाई गई है। जिसके तहत पहली मर्तबा अत्याधुनिक बेस किचनों में खाना बनेगा जबकि अलग एजेंसियों के जरिये ट्रेनों में उसकी आपूर्ति की जाएगी।1स्टेशन विकास165 से ज्यादा रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की तैयारी है। इनके लिए बोली की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में है। हबीबगंज और गांधीधाम स्टेशनों का पुनर्विकास शुरू भी हो चुका है।

ऑनलाइन शिकायत1सोशल मीडिया के जरिये शिकायतें दर्ज करने की नई प्रणाली विकसित की गई। बायो टायलेट अकेले एक वर्ष में ट्रेनों में 10 हजार बायो टायलेट फिट किए गए, जबकि इससे पहले दस वर्षो में कुल 34 हजार बायो टायलेट लगाए गए थे।ई-टेंडरिंग सभी निविदाएं अब ऑनलाइन दी जाती हैं। सामग्रियों की खरीद भी इसी तरह की जाती है। 25 हजार करोड़ रुपये की सालाना खरीदारी ई-टेंडरिंग से हो रही है। 11ऑनबोर्ड हाउसकीपिंग इसके जरिये ट्रेनों में साफ-सफाई का इंतजाम किया गया है। कोई भी यात्री ‘क्लीन माइ कोच’ सेवा के जरिये अपना कोच साफ करवा सकता है। यह सुविधा 864 ट्रेनों में उपलब्ध है। ट्रेनों और स्टेशनों की रैंकिंग की जाने लगी है। रेलवे का सौ फीसद लेनदेन कैशलेस करने का लक्ष्य है।

99 फीसद माल आय तथा 68 फीसद यात्री आय कैशलेस हो चुकी है।माल ढुलाई से राजस्व वृद्धि 1माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़कर 37 फीसद होने से राजस्व में बढ़ोतरी हुई है, जबकि गैर किराया राजस्व में 15 फीसद का इजाफा हुआ है। इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग के परिणामस्वरूप दस वर्षो में 50 हजार करोड़ रुपये की बचत होने की आशा है।1ऊर्जा बचत1बिजली और डीजल की बचत के अलावा सौर व पवन ऊर्जा संयंत्र लगाने के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इससे दस सालों में 41 हजार करोड़ रुपये की बचत का लक्ष्य है।

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Category: Indian Railways, News

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