Railway Board issues fresh instruction on Track Maintenance, Gangman Recruitment rules to change

| August 23, 2017

उत्कल एक्प्रेस हादसे के बाद रेलवे सख्त, ट्रेनों का समयपालन प्रभावित होने की आशंका, यात्री रहें तैयार ट्रेन भी रद्द हो सकती है, बिना मंजूरी ट्रैक पर मरम्मत कार्य नहीं होगा गैंगमैन भर्ती नियम बदलेंगे, सवा लाख पद खाली

उत्कल एक्सप्रेस हादसे से सबक लेते हुए रेलवे बोर्ड ने बिना अनुमति ट्रैक मरम्मत कार्य पर प्रतिबंध लगा दिया है। इंजीनियरिंग विभाग दो स्टेशनों के बीच ब्लाक मिलने के बाद ही ट्रैक की मरम्मत करेगा। ऐसी स्थिति में मरम्मत कार्य पूरा होने तक ट्रेनें खड़ी रहेंगी या 10-15 की रफ्तार में ट्रेनें चलेंगी। इससे ट्रेनों का समयपालन बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है।विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रैक पर फ्रैक्चर, पेंड्रोन क्लिप खुलने, टुकड़ा गायब होने या एलाइनमेंट में गड़बड़ी नजर आने पर इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों को यह विशेषाधिकार है कि वह ट्रेन को रोक कर ट्रैक की खराबी दुरुस्त करा सकते हैं।








अधिकारियों द्वारा बिना अनुमति के ट्रैक मरम्मत कराना प्रतिदिन का कार्य है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो रेल फ्रैक्चर-वेलिं्डग फ्रैक्चर से ट्रेन हादसे बढ़ जाएंगे। रेलवे बोर्ड ने मंगलवार को सभी जोन के जीएम व डीआरएम को निर्देश दिए हैं कि ब्लाक मिलने के बाद ही ट्रैक मरम्मत कार्य कराया जाए। जानकारों का कहना है कि देश के प्रमुख रेल मार्गो पर बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनों के चलते मरम्मत कार्य के लिए ब्लाक देना व्यवहारिक नहीं है। जानकारों का कहना है कि रेलवे बोर्ड संरक्षा के बड़े कार्यो को समय पर पूरा करने के लिए ट्रेनों को रद्द करने योजना बना रहा है। हालांकि इसकी जानकारी यात्रियों को पहले दे दी जाएगी। इसके साथ ही उक्त ट्रेनों का एडवांस रिजर्वेशन बंद कर दिया जाएगा।




रेलवे बोर्ड गैंगमैन की भर्ती के लिए 10वीं पास के साथ आईटीआई अनिवार्य करने की तैयारी कर रही है। वर्तमान में गैंगमैन के पद के लिए बीटेक, एमबीए छात्र भी आवेदन करते हैं। लेकिन भर्ती होने के बाद उपकरणों से भरे बैग को लेकर ट्रैक पर चलने से कतराते हैं। ट्रैक मरम्मत कार्य में उनका मन नहीं लगता है। सूत्रों ने बताया कि रेलवे में वर्तमान में सवा लाख से अधिक रेल संरक्षा पद रिक्त हैं। इस पदों को भरने के लिए रेलवे जल्द ही अभियान शुरू करेगी। मालूम हो कि छह हजार ट्रैक फ्रैक्चर की घटनाएं सालाना होती है। इनमें सबसे ज्यादा घटना उत्तर भारत में होती है।




कोई खामी तो नहीं थी ट्रैक सर्किटिंग में अगर ट्रैक सर्किटिंग होती तो सिग्नल ग्रीन नहीं होता

खतौली रेल हादसे को लेकर तरह-तरह के सवाल सामने आ रहे हैं। इनमें एक अहम सवाल यह भी सामने आ रहा है कि ट्रैक सर्किटिंग में कोई खामी तो नहीं थी या कोई और वजह थी। अगर ट्रैक सर्किटिंग थी और उसपर काम चल रहा था तो उत्कल एक्सप्रेस के लोको पायलट को रेड सिग्नल क्यों नहीं मिला? हालांकि इसका जवाब भी जांच रिपोर्ट में मिलेगा। इसके बाद ही यह समझ में आएगा कि एक लापरवाही को रोकने के लिए होने वाली कार्रवाई में कितनी लापरवाही हुई है।रेलवे से जुड़े जानकारों की मानें तो संरक्षा के लिहाज से रेलवे के ट्रैक को सर्किट किया जाता है।

इसका आशय यह है कि यदि रेलवे लाइन पर कोई काम चल रहा है तो ट्रैक सर्किट हटा होगा और उसपर आने वाली ट्रेन को सिग्नल रेड नहीं मिलेगा। ऐसे सिग्नल स्टेशन पर आने और स्टेशन से बाहर जाने के बाद होते हैं। सिग्नलों के कलर को देखकर ही लोको पायलट ट्रेन की रफ्तार को बढ़ाता है और कम करता है। यदि सिग्नल रेड है तो लोको पायलट को ट्रेन रोकनी पड़ती है।बताया जाता है कि खतौली में उत्कल एक्सप्रेस की दुर्घटना को इस नजरिए को भी देखा जा रहा है। अगर लाइन मरम्मत का कार्य चल रहा था और इस दौरान मरम्मत करने वाले कर्मचारियों ने छह सौ मीटर पहले और 12 मीटर पहले लाल झंडी नहीं लगाई। लिहाजा ट्रेन पूरी रफ्तार से आ गई। लेकिन यदि ट्रैक सर्किटिंग था और लाइन मरम्मत के वक्त सर्किट हटा था तो उत्कल एक्सप्रेस के लोको पायलट को ग्रीन सिग्नल कैसे मिल गया है। कहीं ट्रैक सर्किटिंग को लेकर कोई खामी तो नहीं थी। इन सवालों के जवाब रेल संरक्षा आयुक्त की जांच में ही मिलेंगे। लिहाजा अब जांच रिपोर्ट का ही इंतजार करना पड़ेगा।

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Category: Indian Railways, News

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