कोठियों में काम कर रहे दो लाख कर्मचारी

| August 23, 2017

उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद ट्रैक की मरम्मत में जुटे दिल्ली डिवीजन के ट्रैकमैन रामनरेश ने अपने ही महकमे की पोल खोल दी। मीडिया से बातचीत में उसने कहा कि भारतीय रेलवे में ट्रैक पर काम करने वाले करीब साढ़े तीन लाख कर्मचारी हैं। इनमें से दो लाख कर्मचारी ट्रैक के बजाय अफसरों की कोठियों में नौकरी कर रहे हैं। यदि ये कर्मचारी कोठियां छोड़कर ट्रैक पर लगा दिए जाएं तो ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।

ट्रैकमैन रामनरेश ने खतौली रेल हादसे के लिए अधिकारियों को ही जिम्मेदार माना। उसने बताया कि ब्लॉक लेने की जिम्मेदारी रेलवे के सीनियर सेक्शन अधिकारी की होती है। इसके बाद स्टेशन मास्टर को बाकायदा ब्लॉक होने की रिसी¨वग दी जाती है। कई बार ब्लॉक मिलता भी नहीं है। ऐसे में अधिकारी अपने अंदाजे से बिना ब्लॉक लिए ट्रैक पर मरम्मत कार्य कराते हैं। इसमें उनका अंदाजा होता है कि वे ट्रेन आने से पहले मरम्मत कार्य पूरा करा लेंगे।

मगर यहां खतौली हादसे में अधिकारियों का यह अंदाजा सही साबित नहीं हुआ और काम पूरा होने से पहले ही ट्रेन तेज गति से आ गई। रामनरेश ने कहा, ट्रैक पर मेंटीनेंस करने वाला कोई नहीं है। जो कर्मचारी हैं, वे अधिकारियों ने अपनी कोठियों में काम करने के लिए लगा रखे हैं। जो कर्मचारी ट्रैक पर काम कर रहे हैं, उन पर इतना वर्कलोड है कि आराम करने तक की फुर्सत नहीं है। इसलिए वे मरम्मत कार्य के वक्त ही थोड़ा बहुत आराम कर लेते हैं। रामनरेश ने अपने ही विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि जो भी इसके विरोध में आवाज उठाता है, उसे सस्पेंड कर दिया जाता है।

मेरठ/खतौली कार्यालय संवाददाता

’ दिल्ली डिवीजन में तैनात ट्रैकमैन रामनरेश ने खोली रेलवे महकमे की पोल’ बोला-3.50 लाख ट्रैकमैन में से दो लाख कर्मचारी तो अफसरों की कोठी पर’ सभी रेलवे कर्मचारियों को ट्रैकपर उतारा जाए तो शायद न हों रेल हादसे

वायरल ऑडियो में रेस्ट कीपर प्रदीप की आवाज

कलिंग उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद दुर्घटना को लेकर दो रेलकर्मियों के बीच हुई बातचीत की चर्चित ऑडियो में एक आवाज दुर्घटना के समय सफीदा रोड पर ड्यूटी पर तैनात रेस्टकीपर प्रदीप की थी। प्रदीप खतौली में ही दयालपुरम में अपने परिवार के साथ रहता है। उसके पिता भी वर्षो तक रेलवे की नौकरी कर चुके हैं और उन्होंने एक स्कीम के तहत खुद वीआरएस लेकर अपने स्थान पर अपने पुत्र प्रदीप को नौकरी दिला दी। आज खुफिया विभाग की टीम ने दयालपुरम में पहुंचकर प्रदीप के परिजनों से बात कर उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि की जांच की। प्रदीप के पिता ने इस बात की पुष्टि की कि उसके बेटे की ही आवाज है और जिससे वह बात कर रहा है वह करीब दो ढाई साल पहले इसी गैंगनंबर 16 का सदस्य रह चुका है जो दुर्घटना से पूर्व रेल लाइन पर काम कर रहा था।

रेल विभाग के दो कर्मियों की जो बातचीत का ऑडियो वायरल होकर तहलका मचा रहा है उसमें खतौली रेलवे स्टेशन पर ही रेस्टकीपर के रूप में कार्यरत प्रदीप अपने पुराने रेलकर्मी से बात कर रहा है। खुफिया विभाग की जांच और कॉल डिटेल में यह स्पष्ट हो गया है कि बातचीत करने वाला कर्मी प्रदीप ही है। घटना के समय वह सफीदो रोड पर बनी खतौली के निकट की रेलवे क्रासिंग नंबर 43 ए पर गेटमैन की ड्यूटी कर रहा था। उसने ही उत्कल के लिए गेट बंद किया था और उसके रेलवे क्रासिंग से पार होने के करीब एक किलोमीटर दूर खतौली प्लेटफार्म पार कर उत्कल दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसके बाद ही प्रदीप की अपने पुराने साथी (जिसका सर नेम मीणा) हैं से बातचीत हुई।

रेलवेकर्मियों ने बताया कि उक्त मीणा भी करीब दो ढाई साल पहले इसी गैंग नंबर 16 का गैंगमैन था जिस पर लापरवाही से बिना ब्लॉक लिए रेल लाइन पर काम करने का आरोप लगा है। मीणा इस समय पंजाब के पठानकोट जिले में पाइंट मैन के रूप में कार्यरत है। पाइंटमैन को रेलवे की साधारण भाषा में कांटेवाला कहा जाता है जो रेल की शंटिंग कराकर इंजन में मालगाडी के डिब्बे अलग कराता है और जोड़ता है। माना यह जा रहा है कि योजनाबद्ध तरीके से प्रदीप से सारी बात कहलाकर उक्त रेलकर्मी ने पठानकोट से ही उस ऑडियो को वायरल किया है। पठानकोट बहुत बडा आतंकी हमला ङोल चुका है जिस कारण पठानकोट का नाम ऑडियो में आते ही खुफिया विभाग के कान खडे हो गए और ऑडियों की जांच शुरू हुई। ऑडियों की जांच में यह तो स्पष्ट हो गया कि आवाज प्रदीप की है। ऑडियो वायरल होने से जहां रेल विभाग की सच्चई सामने आई वहीं प्रदीप का परिवार काफी डरा हुआ है। घटना के बाद से ही प्रदीप मीडिया से बचता हुआ घूम रहा है।

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Category: Indian Railways, News

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