मुजफ्फरनगर हादसा: उत्तर रेलवे के GM समेत 8 कर्मचारियों पर गाज

| August 20, 2017

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नई दिल्ली
मुजफ्फरनगर के खतौली में हुए रेल हादसे में रेलवे ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नॉर्दर्न रेलवे के जीएम आरएन कुलश्रेष्ठ को छुट्टी पर भेज दिया है। उनकी जगह नॉर्थ सेंट्रल रेलवे के जीएम एमसी चौहान को यहां की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा दिल्ली रीजन के डीआरएम को भी छुट्टी पर भेजा गया है। रेलवे ने कुल 8 कर्मचारियों पर कार्रवाई की है। इसमें नॉर्दर्न रेलवे के जीएम और दिल्ली के डीआरएम के अलावा रेलवे बोर्ड के इंजिनियरिंग डिपार्टमेंट के मेंबर को भी छुट्टी पर भेजा गया है। एक अधिकारी का तबादला किया है, साथ ही चार कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है।

जिन अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है, उनमें पीवे डिपार्टमेंट के जेई, एसएसई, सेक्शन के एईएन और दिल्ली के सीनियर डीईएन शामिल है। वहीं चीफ ट्रैक इंजिनियर का तबादला किया गया है।








उत्कल एक्सप्रेस हादसा: ट्रैक पर बिना परमिशन चल रहा था काम? रेलवे करेगी जांच

रेलवे ने रविवार को यह संकेत दिए कि उत्कल एक्सप्रेस हादसे के लिए लापरवाही जिम्मेदार हो सकती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि इस बात की भी जांच की जाएगी कि कहीं ट्रैक पर बिना इजाजत काम तो नहीं चल रहा था। रेलवे ट्रैफिक के सदस्य मोहम्मद जमशेद ने कहा कि यह ‘साफ’ नहीं हुआ है कि वहां ट्रैक पर किस तरह का काम चल रहा था।

जमशेद ने मीडिया से कहा, ‘पटरियों पर किसी भी तरह के काम के लिए नियम-कानून हैं। हमारे पास मैंटेनेंस मैनुअल्स है जिसमें रेलवे इन्फ्रस्ट्रक्चर पर किसी भी तरह के काम के लिए दिशानिर्देश हैं।’ उन्होंने कहा कि इस बात की जांच की जाएगी कि क्या पटरियों पर कुछ काम हो रहा था और अगर हो रहा था तो क्या नियमों का पालन किया गया।




रेलवे अधिकारी ने कहा, ‘रेलवे सेफ्टी के कमिश्नर शैलेष पाठक द्वारा सोमवार से जांच शुरू की जाएगी। वह तोड़फोड़, तकनीकी खामी या मानवीय चूक समेत हर ऐंगल से जांच करेंगे।’ रविवार को खतौली में दुर्घटनास्थल का दौरा करने वाले जमशेद ने कहा कि उन्होंने पटरियों पर मरम्मत के कुछ औजारों को देखा था। हादसे में 20 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

रेल कर्मचारियों की लापरवाही को उजागर करते एक ऑडियो के वायरल होने से जुड़े सवाल पर जमशेद ने कहा, ‘कुछ लोगों की बातचीत की कुछ ऑडियो क्लिप भी सामने आई है। हम लोग इसकी भी जांच करेंगे। इसके अलावा, जब हमने मौके का निरीक्षण किया तो हमने वहां कुछ औजार देखे, जिनका इस्तेमाल पटरियों की मरम्मत में होता है।’




जमशेद ने कहा, ‘जब भी इस तरह का कोई बड़ा हादसा होता है तो बोगियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, पलट जाती हैं, एक दूसरे पर चढ़ जाती है और पटरी से उतर जाती हैं। इस मामले में 200 मीटर का ट्रैक पूरी तरह क्षतिग्रस्त था। इसकी गहराई से जांच की जरूरत है। हर तरह के कदम उठाए जा रहे हैं और जो भी चूक हुई है उसको ध्यान में रखा जा रहा है।’

वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी बताया कि रेलवे पुलिस ने खतौली में इस संदर्भ में FIR दर्ज किया है। उन्होंने कहा, ‘पटरियों, ओवरहेड इक्विपमेंट, सिगनल्स जैसे स्थायी इन्फ्रस्ट्रक्चर की नियमित जांच और मरम्मत होती रहती है। पटरियों की मरम्मत के लिए जरूरत के हिसाब से समय तय किया जाता है ट्रैक को ब्लॉक करके उस पर काम होता है। इस काम के लिए लिखित में इजाजत लेने की जरूरत होती है।’

जमशेद ने कहा कि कभी-कभी इमरजेंसी में मरम्मत की जरूरत भी पड़ती है, लेकिन तब भी अगर अगले स्टेशन को सूचना मिल गई होती है तो उसके बाद आने वाली ट्रेनों को रोक दिया जाता है। उन्होंने कहा कि मरम्मत के बाद सुपरवाइजर भी ट्रैक पर जाते हैं और देखते हैं ट्रेनों को किस रफ्तार से गुजरने की इजाजत दी जाए। उन्होंने कहा कि अगर ट्रैक पर कोई समस्या है तो लाल झंडे भी दिखाए जाते हैं। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस मामले में क्या इन प्रोटोकॉल्स का पालन किया गया, इसकी जांच की जाएगी।

Source:- NBT

Category: Indian Railways, News

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