ग्रीन रेल कॉरिडोर मुश्किल मुहिम, फिर भी रेलवे ग्रीन कारिडोर बनाने की दिशा में आगे बढ़ा

| August 17, 2017

रामेश्वरम, ओखा, पोरबंदर, माता वैष्णो देवी व बाड़मेर के बाद मालदा और आसनसोल के बीच भी ग्रीन रेल कॉरिडोर पर काम शुरू
मीलों लंबी लाइन और उस पर ट्रेनों के बोझ के बीच रेलवे के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाना किसी मुश्किल से कम नहीं है। फिर भी रेलवे धीरे-धीरे रेल लाइनों को ह्यूमन वेस्ट से मुक्त कराने की मुहिम में आगे बढ़ रहा है। रामेश्वरम से ग्रीन कॉरिडोर की शुरुआत करने के बाद रेलवे पश्चिम बंगाल की ओर रुख कर चुका है। रेलवे अब तक करीब सात सौ किलोमीटर लाइन को ही ग्रीन कारिडोर घोषित या चिह्नित कर पाया है, जबकि उसके पास अब भी हजारों किलोमीटर लाइन शेष बची है।दरअसल, स्वच्छ भारत अभियान के तहत रेलवे ने स्वच्छ रेल और स्वच्छ भारत का नारा दिया है। इसके तहत रेल पटरियों को ग्रीन कॉरिडोर के रूप में तब्दील करने का बीड़ा उठाया गया है।








इसकी शुरुआत सबसे पहले दक्षिण रेलवे में रामेश्वरम से माना मदुरै रेलवे स्टेशन के बीच 114 किलोमीटर रेल लाइनों को ग्रीन कॉरिडोर के रूप में घोषित कर की गई। इस कॉरिडोर पर ऐसी कोई भी ट्रेन नहीं चलाई जाती है, जिसके शौचालय से ह्यूमन वेस्ट रेल पटरियों पर गिरे और उन्हें गंदा करे। इसकी शुरुआत पिछले वर्ष करने के बाद दक्षिण रेलवे के ओखा, कानालुस (141 किमी), पोरबंदर (34 किमी) व उत्तर रेलवे के जम्मू तवी से श्री माता वैष्णो देवी रेलवे स्टेशन (78 किमी) को ग्रीन कॉरिडोर घोषित किया गया है। इनके बाद नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे के बाड़मेर से मुना वाव और पीपर रोड से बिलारा (दोनों 114 किमी) को ग्रीन कारिडोर चिह्नित किया गया।




अब ईस्टर्न रेलवे के मालदा टाउन और आसनसोल रेल मंडलों के बीच करीब 200 किलोमीटर के लंबे कॉरिडोर को ग्रीन कॉरिडोर घोषित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इन पर ऐसी कोई भी ट्रेन नहीं चलेगी, जिसका ह्यूमेन वेस्ट रेल लाइनों पर गिरे।रेलवे स्वच्छता अभियान के तहत बड़ी तेजी के साथ ट्रेनों के शौचालय बायो टॉयलेट में तब्दील करने में लगा हुआ है। यह मुहिम किसी मुश्किल से कम नहीं है, क्योंकि रेलवे के पास 40 हजार रेल डिब्बे हैं और 64 हजार किलोमीटर से अधिक रेल लाइनें।

इन पर प्रतिदिन हजारों ट्रेनें चलती हैं। रेलवे की कोशिश है कि 2019 तक सभी ट्रेनों में के मौजूदा टॉयलेट को बायो टॉयलेट में तब्दील कर दिया जाए। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए रेलवे नए बनने वाले डिब्बों में बायो टॉयलेट की फिटिंग कर रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, 2019 तक 50 हजार बायो टॉयलेट युक्त डिब्बे रेल पटरियों पर आ जाएंगे।




रेलवे भले ही अभी तक हजार किलोमीटर ही रेल कॉरिडोर चिह्नित कर पाया है, लेकिन जिस तेजी से बॉयो टॉयलेट डिब्बों में फिट होते जाएंगे, उसी तेजी से ग्रीन कारिडोर की लंबाई बढ़ती जाएगी। इस मुहिम को रेलवे ने चुनौती के रूप में लिया है और सभी जोनल रेलवे को इस लक्ष्य को हासिल करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल सभी जोनल रेलवे अपनी ऐसी लाइनों को चिह्नित करने में लगे हेैं, जिन्हें ग्रीन कॉरिडोर के रूप में घोषित कर दिया जाए।

green rail corridor

Category: Indian Railways, News

About the Author ()

Comments are closed.