रेलवे का मिशन स्पीड प्लान, 2020 के बाद सेमीहाईस्पीड ट्रेनें

| August 17, 2017

नई दिल्ली ’ एजेंसीरेलवे बोर्ड ने फैसला किया है कि जिन दोहरीकृत रेलमार्गो को तीसरी लाइन के लिए चुना गया है, उनमें तीसरी लाइन का निर्माण डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर (डीएफसी) के स्तर का किया जाएगा। भारतीय रेलवे के क्षमता विस्तार कार्यक्रम को तेज करते हुए उन्हीं मार्गो पर उसी स्तर की चौथी लाइन बिछाने की भी मंज़ूरी दी जाएगी।








इससे 2020 के बाद देश में प्रमुख मार्गो पर सेमी हाईस्पीड ट्रेनें चलाना संभव हो जाएगा।आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, रेलवे बोर्ड ने हाल ही एक बैठक में फैसला लिया है कि जहां कहीं भी तीसरी रेल लाइन बिछाने की स्वीकृति प्रदान की गई है और निर्माण शुरू नहीं हुआ है, वहां तीसरी लाइन का निर्माण डीएफसी के स्तर का किया जाएगा।




अगर ज़रूरी हो तो चौथी लाइन के निर्माण को भी मंज़ूरी दी जाएगी। बोर्ड ने इसी माह सभी ज़ोनल रेलवे को इस आशय के निर्देश जारी किए हैं और डीएफसी स्तर पर तीसरी लाइन के निर्माण के लिए उपयुक्त सामग्री की खरीद एवं प्रयोग के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। सूत्रों ने कहा कि तीसरी-चौथी लाइन बनने के तुरंत बाद उस मार्ग की मौजूदा पटरियों को भी डीएफसी स्तर तक उन्नत किया जाएगा। इससे गैर डीएफसी मार्ग पर भी मालगाड़ियों की रफ्तार भी बढ़ सकेगी।




तीसरी लाइन को इस प्रकार से बनाया जाना है कि जरूरत पड़ने पर दोनों दिशाओं की ओर गाड़ियां चलाई जा सकें। तीसरी लाइन की सिगनलिंग एवं रूटिंग विशेष रूप से तैयार की जाएंगी। इसके साथ साथ तीसरी लाइन के साथ चौथी लाइन बनाने की जगह छोड़ी जाएगी, ताकि जब भी चौथी लाइन बनाने का निर्णय हो तो केवल पटरी बिछाने का काम बाकी रहे ।

किलोमीटर पर साधारण ट्रैक पर सिग्नल लगे होते हैं

टन प्रति मीटर की है भारवहन क्षमता

02 किलोमीटर की दूरी पर डीएफसी लाइन में पूर्णत: स्वचालित सिग्नल

25 टन एक्सेल लोड की होती है डीएफसी में रेल पटरियों की क्षमता

टन प्रतिमीटर है भार वहन क्षमता

22.9 टन एक्सेल लोड की है साधारण ट्रैक की क्षमता

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Category: Indian Railways, News

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