राजधानी एक्सप्रेस में अब तक की सबसे बड़ी चोरी

| August 17, 2017

रेल यात्रियों की सुरक्षा के मकसद से एक केंद्रीय बल फौरन बनाने की जरूरत है, जिसके पास चोरों और लुटेरों से निपटने के ज्यादा अधिकार हों। अरसे से ऐसी मांग होती रही है, लेकिन अपनी लापरवाही पर लीपापोती करके रेल मंत्रालय और जीआरपी जैसे तंत्र इसके गठन में रोड़े अटकाते रहे हैं। भारतीय रेल को ध्यान रखना होगा कि उसकी खूबी सिर्फ यह नहीं है कि वह दुनिया के विशालतम रेल नेटवर्क का कुशलता से संचालन करती है, बल्कि यह भी होनी चाहिए कि उसकी ट्रेनों में यात्रा हर तरह से सुरक्षित हो।
ट्रेन स्टाफ भी शक के घेरे में








जिस तरह चोरी हुई, उससे लगता है कि चोर ट्रेन के नक्शे से वाकिफ थे। ऐसे में शक की सुई ट्रेन के सफाई स्टाफ से लेकर कैटरिंग और बेड रोल स्टाफ की ओर भी घूम रही है। सफर करने वाले अन्य कर्मचारियों पर भी शक है। 8पेज 3
रेकी, बेहोश करने की आशंका

जिस तरह सात कोचों को निशाना बनाया गया, उससे लगता है कि चोरों ने ट्रेन की रेकी की थी। जिस कोच में लगा कि यात्री नींद में हैं, उन्हीं को निशाना बनाया गया। यात्रियों को कुछ सुंघाकर बेहोश करने का भी शक है।

बेहद सुरक्षित मानी जाने वाली राजधानी ट्रेन के एसी कोचों में अब तक की सबसे बड़ी चोरी की खबर है। मुंबई से दिल्ली आ रही अगस्त क्रांति राजधानी एक्सप्रेस के सात डिब्बों में चोरों ने करीब 20 यात्रियों की लाखों की नकदी, जूलरी, घड़ियों और मोबाइल पर हाथ साफ कर दिया। ट्रेन के दिल्ली पहुंचने पर केस दर्ज किया गया।




डीसीपी (रेलवे) परवेज अहमद के मुताबिक, कोच नंबर 3, 5, 6, 7, 10, 11 और ए-1 में रतलाम और कोटा के बीच मंगलवार-बुधवार की रात वारदात हुई। यात्रियों को अपने खाली बैग और पर्स ट्रेन के अंदर पैंट्री कार, अवन, बाथरूम जैसी जगहों पर मिले। हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन जीआरपी थाने में जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। इसे रतलाम जीआरपी को भेजा जाएगा। कुछ यात्रियों के मुताबिक, इसी ट्रेन में एक-दो दिन पहले भी चोरी हुई थी, लेकिन घटना को दबा दिया गया। शुरुआती जांच में सबसे बड़ी कमी ट्रेन में चल रहे सुरक्षाकर्मियों और टीटीई की लग रही है।

ट्रेन के अंदर वाले स्टाफ पर भी शक

अगर बीच रास्ते से लोग चढ़े तो टीटीई और एस्कॉर्ट कहां थे

नई दिल्ली : अगस्त क्रांति राजधानी ट्रेन में हुई चोरी को अब तक की ट्रेन में हुई सबसे बड़ी वारदात में माना जा रहा है। इसे रेकी करके चलती ट्रेन में अंजाम दिया। इसमें चोर रिजर्वेशन करके भी ट्रेन में सवार हो सकते हैं या फिर ट्रेन के अंदर ही सवार कुछ कर्मचारियों ने इस वारदात को अंजाम दिया गया लगता है। हालांकि, अभी तक चलती ट्रेन में हुई चोरी की इस वारदात की गुत्थी को सुलझाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।




दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन जीआरपी द्वारा जीरो एफआईआर करके रतलाम जीआरपी को भेजी जा रही है। फिर रतलाम जीआरपी ही इस मामले की आगे की जांच करेगी। सूत्रों का कहना है कि तब तक ट्रेन के अंदर जो सबूत पुलिस को मिल सकते थे। हो सकता है वह भी मिट जाएं। यात्रियों का कहना है कि इस ट्रेन में कुछ दिन पहले भी चोरी हुई थी। लेकिन इस बात को देखते हुए भी यात्रियों की सुरक्षा के कोई ठोस प्रबंध नहीं किए गए।

ट्रेन के एस्कार्ट के लिए आरपीएफ के जो जवान ट्रेन के अंदर तैनात थे। वह काफी देर तक चली चोरी की इस वारदात से पूरी तरह से अनभिज्ञ रहे। यात्रियों का आरोप है कि अधिकतर वक्त ट्रेन को एस्कार्ट करने वाली जीआरपी और आरपीएफ के जवान ट्रेन के अपने पहले स्टेशन से रवाना होने के कुछ देर बाद पावर कार में चले जाते हैं। कुछ तो यहां आकर सो भी जाते हैं। ऐसे मे चाहें ट्रेन लुटे या ट्रेन में डकैती पड़े उन्हें कुछ फर्क नहीं पड़ता।

इस वारदात के बारे में भी यात्रियों का आरोप है कि जब ट्रेन के अंदर आरपीएफ के जवान एस्कार्ट के रूप में मौजूद थे, तब ट्रेन के इतने डिब्बों में चोरी कैसे हो गई/ यहीं नहीं अगर ट्रेन में किसी स्टेशन से चोर चढ़े तो फिर ट्रेन के टीटीई क्या कर रहे थे/ क्योंकि प्रत्येक यात्री के चढ़ने पर टीटीई उनके टिकट को चेक करते हैं। लेकिन चोरी की इस वारदात में अब तक चोरों को पकड़ने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।

चोरी की वारदात को अंजाम देने के तरीके से लगता है कि चोरों या फिर उनके साथियों ने इस ट्रेन के प्रत्येक कोच की पहले रेकी की। जिस-जिस कोच मे उन्हें लगा कि यात्री गहरी नींद मे सोए हुए हैं। उन्हीं कोच को निशाना बनाया गया। इसमें शक की सुई ट्रेन में साफ-सफाई का काम करने वाले ग्राउंड हैंडलिंग स्टाफ से लेकर कैटरिंग और बेड रोल स्टाफ पर भी घूम रही है। यही नहीं ट्रेन में इलेक्ट्रिक और अन्य स्टाफ भी चलता है। इनके उपर भी शक जताया जा रहा है। चोरों ने वारदात को अंजाम देने के लिए भी वह वक्त चुना जब आमतौर पर लोगो को गहरी नींद आती है।

इस मामले में सूत्रों का यह भी कहना है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि यात्रियों को कुछ सुंघाया गया हो। जब यात्री गहरी नींद मे सो गए हों तब चोरियां की गईं हों। यात्रियों का कहना है कि सबसे बड़ा सवाल तो ट्रेन की एस्कार्ट का है। जब इस ट्रेन को एस्कार्ट करने के लिए आरपीएफ के जवान चल रहे थे, तब उन्हें कैसे पता नहीं लगा कि ट्रेन में बड़ी संख्या में चोर घुस आए हैं। क्योंकि चोरी की जो घटनाएं हुईं हैं। उससे इसमें एक या दो नहीं बल्कि पांच या इससे अधिक चोरों के गैंग के होने का शक जताया जा रहा है। इसके अलावा जिस तरीके से चोरी किए गए पर्स आदि पेंट्री कार और ओवन में मिले हैं। उससे लगता है कि चोर इस ट्रेन के नक्शे से पूरी तरह से वाकिफ थे। एक बात यह भी सामने आ रही है कि क्या चोर भी रिर्जवेशन कराकर सफर कर रहे थे। अगर ऐसा था तो फिर इसकी भी जांच की जाएगी। ट्रेन में रतलाम और कोटा के बाद जो भी यात्री इस ट्रेन में चढ़े और उतरे उन सभी की डिटेल से जांच में पता चल सकता है।

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Category: Indian Railways, News

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