Government of India to make interview compulsory for high level posts

| August 15, 2017

नई दिल्ली : सरकार में सीनियर पदों पर नियुक्ति से पहले संबंधित अधिकारी का इंटरव्यू होना चाहिए और उन्हें अपनी विशेषज्ञता के हिसाब से ही पोस्टिंग मिलनी चाहिए। अभी जो सिस्टम है उसमें योग्यता और विशेषज्ञता का इनके लिए कोई पैमाना नहीं होता है। अगर गवर्नेंस में बेहतर नतीजे पाने हैं तो इस दिशा में तुरंत बड़ा कदम उठाना होगा। सरकार को ये सुझाव एक संसदीय कमिटी ने दिए हैं।







प्रशासनिक सुधार से जुड़े मसलों पर नीति तय करने के लिए बनी स्टैंडिंग कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में एक प्रस्ताव सरकार को दिया है। कमिटी ने सुझाव दिया है कि संयुक्त सचिव के रूप में प्रोन्नति देने से पहले सभी अधिकारियों का एक इंटरव्यू हो, जिससे उनकी विशेषज्ञता तय हो। इसके बाद आगे भविष्य में उनका प्रमोशन और नियुक्ति उसी अनुरूप हो। कमिटी की रिपोर्ट मिलने के बाद डीओपीटी सूत्रों के कहा कि प्रशासनिक सुधार के तहत इस बारे में पहले से विचार-विमर्श चल रहा है और संसद की कमिटी की रिपोर्ट पेश होने के बाद निश्चित तौर पर इस दिशा में पहल तेज होगी। कमिटी ने डीओपीटी से संसद के अगले सत्र से पहले अपनी राय देने को कहा है।



कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सातवें वेतन आयोग में प्रोन्नति और वेतन बढ़ोतरी में प्रदर्शन को पैमाना बनाया गया है। इसके तहत कहा गया है कि जिनका काम पैरामीटर पर खतरा नहीं उतरेगा, उनका अप्रैजल या इन्क्रीमेंट नहीं होगा। साथ ही, नियमित प्रमोशन पर भी इसका असर पड़ेगा। पहले ‘गुड’ कैटिगरी में रहने पर वेतन बढ़ोतरी और प्रोन्नति मिलती थी, लेकिन अब इसके लिए ‘वेरी गुड’ कर दिया।





ब्यूरोक्रेसी में लैटरल एंट्री पर अंतिम फैसला पीएम नरेंद्र मोदी लेंगे। मंत्रियों के दल ने लैटरल एंट्री से जुड़े सभी पहलुओं को समेटते हुए अपनी रिपोर्ट दे दी है। भले ही नीतिगत रूप से इस पर औपचारिक नीति बने, लेकिन मोदी सरकार सैद्धांतिक रूप से सरकार के अंदर नीतिगत फैसले वाले पदों पर विशेषज्ञों की नियुक्ति करने पर सहमत है। पिछले दिनों आयुष मंत्रालय में सचिव स्तर के अधिकारी के रूप में नियुक्ति इसका बड़ा संकेत था।
बिना इंटरव्यू नहीं बन पाएंगे ‘बड़े’ नौकरशाह!

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