सीजेआई का वेतन कैबिनेट सचिव से ज्यादा, 2.8 लाख रुपये प्रतिमाह मिलेंगे

| July 20, 2017

उच्च न्यायपालिका में जजों के वेतन में ढाई गुना से अधिक की बढ़ोतरी होने वाली है। फिलहाल मुख्य न्यायाधीश का वेतन एक लाख रुपये है। यह बढ़कर 2.8 लाख रुपये प्रतिमाह होने वाला है जो कैबिनेट सचिव के नए वेतन से 30,000 रुपये ज्यादा होगा। आजादी के बाद उच्च न्यायपालिका के जजों का वेतन सिर्फ तीन बार ही बढ़ा है।








पहली बार 1986 में जब उनके वेतन को दोगुना किया गया था। उसके बाद 1998 में जब वेतन को तीन गुना बढ़ाया गया। अंतिम बार 2009 में एक बार फिर से यह तीन गुना बढ़ा और सीजेआई का वेतन एक लाख रुपये तथा जजों का वेतन 90,000 रुपये किया गया। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें आने के बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश टी.एस. ठाकुर ने केंद्र को जजों के वेतन वृद्धि की सिफारिशें भेजी थीं।




सातवें वेतन आयोग के बाद केंद्र के कर्मचारियों के मूल वेतन में 15 फीसदी का इजाफा हुआ है जिसमें सेना, अर्धसैनिक बल और पुलिस शामिल हैं। लेकिन कैबिनेट सचिव के पद पर यह वृद्धि 160 फीसदी हुई, जिससे उनका वेतन 90,000 से बढ़कर 2.5 लाख रुपये हो गया है। जस्टिस ठाकुर ने सिफारिशों में कहा कि देश के मुख्य न्यायाधीश का वेतन तीन लाख, सुप्रीम कोर्ट जज का वेतन 2.5 लाख, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का वेतन 2.5 लाख और हाईकोर्ट जज का वेतन 2.25 लाख (भत्ते शामिल नहीं) किया जाए।




जजों की वेतन वृद्धि के बारे में कैबिनेट नोट बन गया है और जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद केंद्रीय कानून मंत्रलय जजों के वेतन में संशोधन के लिए संसद में बिल लाएगा और नया वेतनमान लागू हो जाएगा। वेतन बढ़ने के बाद जजों के भत्ताें में भी बढ़ोतरी होगी। इनमें घर की साज-सज्जा के लिए सीजेआई को 10 लाख रुपये मिलेंगे जबकि जजों के लिए यह राशि 6 लाख रुपये होगी।

पद मौजूदा वेतन संशोधित वेतन (रुपयों में)मुख्य न्यायाधीश एक लाख 2.8 लाखसुप्रीम कोर्ट जज 90 हजार 2.5 लाखहाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश 90 हजार 2.5 लाखहाईकोर्ट जज 80 हजार 2.5 लाख

सुप्रीम कोर्ट ने तीन माह पूर्व ही जस्टिस पीवी रेड्डी की अध्यक्षता में वेतन आयोग का गठन किया है। आयोग अगले वर्ष रिपोर्ट पेश करेगा।

वकील सुप्रीम कोर्ट में पेश होने के लिए 10 से 20 लाख रुपये तक लेते हैं। कम वेतन को देखते हुए कई वकील जज नहीं बनना चाहते।
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Category: CAT Judgements, News

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