Intense Privatization of Indian Railways begins, Private Loco Pilots to run trains

| July 10, 2017
रेलवे के निजीकरण की शुरुआत 1995 से हुई निजीकरण की शुरुआत रेलवेमें वर्ष 1995 के बाद से छोटे-छोटे कामों को प्राइवेट…
 रेलवे के निजीकरण की शुरुआत
1995 से हुई निजीकरण की शुरुआत

रेलवेमें वर्ष 1995 के बाद से छोटे-छोटे कामों को प्राइवेट पार्टियों को ठेके पर दिया जाने लगा। हालात ये हैं कि अब कारखानों में डिब्बों की मरम्मत के काम आने वाले पार्ट्स और उपकरण भी बाजार से लिए जाने लगे हैं। रेलवे ने विभागीय जलपान गृह बंद कर कैटरिंग सेवाएं आईआरसीटीसी को सौंप दी। अब रेलवे में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर तैयार करने का प्रोजेक्ट शुरू है। इस कॉरीडोर पर निजी फर्मों की ट्रेनें दौड़ेंगी। फर्मों ने पहले ही पोर्ट साइडिंग ले रखी हैं।








उन क्षेत्रों में फर्मों के लोको पायलट ही ट्रेनों को लाते ले जाते हैं। फ्रेट कॉरीडोर पर निजी मालगाड़ियां दौड़ने पर फर्मों को लोको पायलट की जरूरत होगी। इसके लिए ही फर्मों ने लोको पायलट को ट्रेनिंग दिलाने का काम शुरू कर दिया है।



अडानी-अंबानी के लोको पायलट ने ली ट्रेनिंग: ऑलइंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के सहायक महामंत्री मुकेश गालव के अनुसार ये इंडियन रेलवे के लिए बेहतर संकेत नहीं है। उदयपुर जोनल रेलवे ट्रेनिंग सेंटर पर पिछले दिनों अडानी, अंबानी ग्रुप के लगभग 50-60 लोको पायलट ट्रेनिंग ले चुके हैं। आने वाले दो साल में रेलवे में कई नए बदलाव होंगे उसमें निजी फर्मों की ट्रेन को दौड़ाया जाना भी शामिल है।




इस तरह के फैसले से रेलवे पूरी तरह से निजीकरण की तरफ बढ़ रही है। वहीं, उत्तर पश्चिम रेलवे के उदयपुर मंडल सचिव एसके महावर भी मानते हैं कि रेलवे निजीकरण की तरफ बढ़ रहा है।
निजीफर्मों के 60 कर्मचारी ले चुके ट्रेनिंग
2 साल में बदल जाएगी रेलवे की सूरत

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Category: Indian Railways, News

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