Railway’s complex rulers on GST becomes headache for Running Staff and Ticket Checking Staff

| July 4, 2017

जीएसटी वसूली के लिए रेल मंत्रलय के पेचिदा नियम रेल यात्रियों और रनिंग स्टाफ (कंडक्टर-टीटीई) पर भारी पड़ रहे हैं। अवैध यात्री किराया और जुर्माना भरने को तैयार हैं, लेकिन तीन फार्म भरने पर उन्हें एतराज है। इसके अलावा यात्री पांच के बजाए 10 फीसदी जीएसटी देने की बात पर झगड़े पर आमादा हैं।








रेल मंत्रलय ने एक जुलाई से सभी वातानुकुलित श्रेणी (एसी-1,2,3, एक्जीक्यूटिव व चेयरकार) पर 5 फीसदी जीएसटी लागू कर दिया है। लेकिन वातानुकूलित श्रेणी में बगैर टिकट अथवा स्लीपर-जनरल टिकट पर यात्र करने वालों से अलग तरीके से जीएसटी वसूला जा रहा है।

रनिंग स्टाफ ने बताया कि नए नियम के तहत ऐसे यात्री से किराया व जुर्माना लेने के साथ पांच-पांच फीसदी अतिरिक्त जीएसटी (कुल 10 फीसदी जीएसटी) लिया जाएगा।इसके अलावा नए नियम में टीटीई-कंडक्टर जीएसटी के तीन फार्म यात्री से भरवाएंगे। फार्म के ऊपर का हिस्सा टीटीई भरेगा और नीचे का हिस्सा यात्री को भरना होगा।




इसमें उनका नाम, पता, मोबाइल नंबर व हस्ताक्षर करने होंगे। अशिक्षित यात्री के उक्त तीन फार्म टीटीई-कंडक्टर को भरने होंगे। यात्रियों का कहना है कि किराया-जुर्माना भरना ठीक है, लेकिन जीएसटी फार्म पर तमाम जानकारियां भरने में परेशानी हो रही है। इस समस्या से यात्री और रनिंग स्टाफ दोनों परेशान हैं। चेक नहीं हो रहे सभी कोच : इंडियन रेलवे रनिंग स्टाफ एसोसिएशन के महामंत्री महेंद्र श्रीवास्तव ने हिंदुस्तान को बताया कि जीएसटी वसूली के चलते ट्रेनों में रनिंग स्टाफ व यात्रियों के बीच नोकझोंक व मारपीट की घटनाएं हो रही हैं।




इससे यात्रियों की नींद हराम हो रही है। रनिंग स्टाफ की पहले से कमी है। ऐसे में जीएसटी के तीन फार्म भरने में वक्त जाया हो रहा है। इससे अधिकांश कोच चेक नहीं हो पा रहे हैं। साथ ही कनफर्म बर्थ पर यात्र करने वालों को परेशानी हो रही है। जीएसटी की पर्याप्त वसूली न हो पाने के कारण राजस्व का नुकसान हो रहा है।

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