GST to bring Lakhs of Jobs immediately after implementation

| June 27, 2017

नई दिल्ली:- वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने से जहां एक ओर कारोबारियों के लिए आसानी होने की बात की जा रही है, वहीं जॉब मार्केट में भी इसे लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद तत्काल एक लाख नई नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। ये नौकरियां स्पेशलाइज्ड प्रफेशन्स में, खासतौर पर टैक्सेशन, अकाउंटिंग और डेटा एनालिसिस में पैदा होंगी। ऐतिहासिक कर व्यवस्था को पूरे देश में 1 जुलाई से लागू किया जाएगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जीएसटी लागू होने के बाद संगठित क्षेत्र के जॉब मार्केट में 10 से 13 फीसदी तक की सालाना ग्रोथ देखने को मिलेगी और इकॉनमी के कई सेगमेंट्स में प्रफेशनल्स की मांग बढ़ेगी।







जॉब क्रिएशन में 10 से 13% तक का इजाफा : इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन की प्रेजिडेंट रितुपर्णा चक्रवर्ती ने कहा कि जीएसटी से प्रॉडक्ट्स की खरीद और उनका वितरण आसान हो जाएगा। इससे कैश फ्लो का अनुमान लग सकेगा और कारोबारियों और ग्राहकों को भी फायदा होगा। रितुपर्णा ने कहा, ‘इस व्यवस्था से पारदर्शिता में इजाफा होगा। इकॉनमी मजबूत होगी। हम उम्मीद करते हैं कि जीएसटी लागू होने के बाद संगठित क्षेत्र में नई नौकरियों के सृजन में 10 से 13 फीसदी तक का इजाफा होगा।’ सर्च फर्म ग्लोबल हंट के एमडी सुनील गोयल ने कहा, ‘अनुमान के मुताबिक जीएसटी से 1 लाख से ज्यादा नौकरियां तुरंत निकलेंगी। जीएसटी लागू होने के बाद की पहली तिमाही में 50 से 60 हजार नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है।’ उन्होंने कहा कि मिड और स्मॉल साइज कंपनियां थर्ड पार्टी के जरिये आउटसोर्सिंग बढ़ा सकती हैं।




राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की इकनॉमिक विंग कहे जाने वाले स्वदेशी जागरण मंच ने नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था जीएसटी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। मंच का कहना है कि जीएसटी से छोटे कारोबारी बुरी तरह प्रभावित होंगे और इससे चीन से आयात बढ़ेगा। मंच के सह संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा, ‘जीएसटी का क्रियान्वयन नजदीक आ रहा है। इसके साथ ही छोटे उद्यमियों और व्यापारियों की धड़कनें बढ़ रही हैं।’




महाजन ने दावा किया कि लघु उद्योगों के लिए 1.5 करोड़ रुपये तक के उत्पादन पर उत्पाद शुल्क की छूट है। जीएसटी प्रावधानों के तहत कोई भी इकाई, जिसका कारोबार 20 लाख रुपये या उससे ऊपर होगा, को खुद को उस राज्य में जीएसटी के लिए रजिस्टर्ड कराना होगा, जहां वह कारोबार कर रही है। उन्होंने कहा कि इस कानून से लघु और कुटीर उद्योग बुरी तरह प्रभावित होंगे। ये उद्योग श्रम आधारित हैं और इनमें से ज्यादातर को हायर टैक्स के दायरे में रखा गया है। महाजन ने दावा किया कि लघु उद्योगों पर नकारात्मक असर से ग्रामीण इलाकों के लोगों का रोजगार छिनेगा और इसके साथ ही घरेलू उत्पादन घटने से चीन से आयात बढ़ेगा। वहीं, सरकार का कहना है कि जीएसटी से आर्थिक वृद्धि दर में दो प्रतिशत का इजाफा होगा।

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