Indian Railways increases RAC seats in Trains, know Why?

| June 16, 2017

ट्रेनों की कमी के कारण सालाना 7500 करोड़ रुपये का देना पड़ता है रिफंड

RAC सीटें बढ़ाकर कमाई का नुस्खा पाया रेलवे ने, रिफंड की रकम रेलवे की टिकट आमदनी का लगभग 20 फीसदी है

नई दिल्ली : ट्रैक और ट्रेनों की कमी की वजह से रेलवे को हर साल लगभग साढ़े सात हजार करोड़ रुपये का रिफंड इसलिए देना पड़ता है, क्योंकि वेटिंग लिस्ट वाले पैसेंजरों का टिकट कन्फर्म नहीं हो पाता। रिफंड की जाने वाली यह रकम रेलवे की टिकट आमदनी का लगभग 20 फीसदी है। अब रेलवे ने इसे कम करने के लिए आरएसी सीटों को बढ़ाया है। जिससे रेलवे को हर महीने लगभग 20 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होने लगी है। रेलवे ने ऐसे टॉप 20 रूट्स की भी पहचान की है, जहां उसे सबसे ज्यादा रिफंड देना पड़ रहा है।








इंडियन रेलवे के सूत्रों का कहना है कि किस रूट पर सबसे ज्यादा यात्रियों की डिमांड है, इसका आकलन करने के इरादे से ही रेलवे ने 2016 के आंकड़ों की समीक्षा की तो पता चला कि इनमें से सात रूट ऐसे हैं, जिनका एक छोर दिल्ली ही है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इन आंकड़ों की समीक्षा के बाद आरएसी सीटों को बढ़ाया गया है।

जुगाड़ से सीटें बढ़ाने की कोशिश : इंडियन रेलवे के एक सीनियर अफसर के मुताबिक, जिन रूटों पर भारी भीड़ है वहां रेलवे ने आरएसी यानी रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन की सीटों की संख्या में बढ़ोतरी की है। दरअसल, हर कोच में साइड की बर्थ होती हैं। इन बर्थ को अगर खोल दिया जाए तो ये सीट में बदल जाती है। इस तरह से अगर बर्थ हो तो उस पर एक ही यात्री सफर कर पाता है, जबकि अगर उसे खोल दिया जाए तो वह दो सीटों में बदल जाती है, यानी दो यात्री बैठकर सफर कर सकते हैं।




रेलवे ने इन सीटों पर ही आरएसी की संख्या बढ़ाई है। यानी एक बर्थ को दो यात्रियों को आरएसी में अलॉट किया जाता है। रेलवे ने इन सीटों को ही बढ़ाया है। मसलन, पहले जहां थर्ड एसी कोच में आरएसी की 6 सीटें होती थीं, उन्हें बढ़ाकर दस कर दिया गया है यानी अब 12 की जगह 20 यात्री जा सकते हैं। इसी तरह से सेकेंड एसी की चार की जगह छह सीटें कर दी गई हैं। इससे ज्यादा यात्री सफर कर सकते हैं। इससे यात्रियों को जाना तो बैठकर पड़ता है, लेकिन उन्हें सीट जरूर मिल जाती है। रेलवे ने यह कवायद पिछले कुछ महीनों से ही शुरू की है और इससे रेलवे को हर महीने लगभग 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त रेवेन्यू भी मिलने लगा है।




पटना, मुंबई और लखनऊ में मारामारी : 2016 में सबसे ज्यादा रिफंड नई दिल्ली से पटना का टिकट खरीदने वाले लोगों को दिया गया। सीट न मिलने की वजह से ऐसे एक लाख 68 हजार से ज्यादा टिकट रद्द किए गए। इन टिकटों पर ढाई लाख से ज्यादा पैसेंजरों को सफर करना था।

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Category: Indian Railways, News, Uncategorized

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