Railway is on track, results will be visible in years to come – Suresh Prabhu

| June 14, 2017

‘रेलवे में सुधार की बुनियाद रखी है, कुछ साल बाद आएंगे नतीजे’

Q. मोदी सरकार और रेल मंत्रालय कामकाज को लेकर दावे करता है। कुछ काम दिखते भी हैं लेकिन आपकी नजर में ऐसे क्या काम हैं, जो अभी आपको फौरन करने की जरूरत है?

अभी कई काम करने की जरूरत है। कामों को दो भागों में बांटा गया है। एक शॉर्ट टर्म, जिनमें स्टेशनों की सफाई, साफ पानी, स्टेशनों पर एस्केलेटर लगाना आदि। ये काम शुरू हो गए हैं और कुछ जगह पूरे भी हुए हैं। कुछ दूसरे कुछ काम हैं, जिनकी बुनियाद हमने रख दी है लेकिन उसके नतीजे अगले तीन से चार साल में दिखेंगे। जैसे नई लाइनें बिछाने और तकनीक को लाने का। उम्मीद है कि 2020 तक ये टारगेट पूरा हो जाएगा।








Q. लेकिन पैसेंजरों की जरूरतें कब पूरी कर पाएंगे आप?

जैसा कि मैं कह रहा था, हमने 16500 किमी की रेल लाइनें बिछाने के लिए शुरुआत की है। तीन साल में ये लाइनें बिछ जाएंगी। ब्रॉडगेज की लाइनों का इलैक्ट्रिफिकेशन हो जाएगा। उस वक्त तक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बन जाएगा और ज्यादातर मालगाड़ियां वहां शिफ्ट हो जाएंगी। इसके बाद यहां रेल लाइनों की क्षमता में एकाएक उछाल आ जाएगा। हमने जो बुनियाद रखी है, तब उसका नतीजा आप देख पाएंगे। तब हम ट्रेनों की तादाद भी बढ़ा सकेंगे और लोगों की आकांक्षाओं को भी पूरा कर सकेंगे।

Q. लेकिन ट्रेनों की लेट लतीफी?

कुछ हद तक शिकायत जायज है लेकिन सभी ट्रेनें लेट नहीं हैं। हम लगातार मॉनिटरिंग करते हैं। हमारे 17 में से 9 जोन में 90 फीसदी से अधिक ट्रेनें वक्त पर चलती हैं जबकि सात जोन में 80 फीसदी से अधिक ट्रेनें वक्त पर होती हैं। कुछ जगह प्रॉब्लम है लेकिन ट्रैक की क्षमता बढ़ते ही यहां भी स्थिति सुधरेगी।

Q. रेल एक्सिडेंट भी तो बढ़ रहे हैं?

हादसों को लेकर हम गंभीर हैं। यह हमारी प्रियॉरिटी है और हम इस मामले में जीरो टॉलरेंस चाहते हैं। लेकिन यह कहना ठीक नहीं होगा कि एक्सिडेंट बढ़ रहे हैं। एक्सिडेंट होने की कई वजहें होती हैं। बिना चौकीदार वाले फाटकों पर एक्सिडेंट की रोकथाम के कई उपाय हुए हैं। ट्रैक में गड़बड़ी पकड़ने के लिए भी हम आधुनिक मशीनों का उपयोग करने जा रहे हैं। इसके अलावा निचले स्तर पर भी फोकस किया जा रहा है ताकि ह्यूमन एरर भी कम से कम हो।




Q. रेलवे के ऑपरेटिंग रेश्यो पर सवाल उठते हैं। एक रुपये कमाने के लिए 94 पैसे तक खर्च करने पड़ते हैं। पिछले दिनों एक पूर्व रेलमंत्री ने भी इस पर सवाल उठाए थे?

जब छठा वेतन आयोग लागू हुआ था, तब रेलवे के ऑपरेटिंग रेश्यो में 13 फीसदी की वृद्धि हुई थी लेकिन सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू होने के बाद रेलवे पर 30 हजार करोड़ का भार बढ़ने के बावजूद ऑपरेटिंग रेश्यो पर तीन फीसदी का ही असर हुआ है। हमने कई पॉजिटिव कदम उठाए हैं। नॉन फेयर रेवेन्यू में 80 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।

Q. निवेश के नाम पर एलआईसी से लोन लिया है। जाइका से भी लोन ले रहे हैं लेकिन रेलवे यह लोन चुकाएगा कैसे/ क्या आपने इसके भविष्य के बारे में कुछ विचार किया है?

रेलवे में निवेश की जरूरत थी। पैसा कहीं से तो आना था। हमने लोन लिया है लेकिन अनाप शनाप खर्च के लिए नहीं बल्कि ऐसी जगह लगाने के लिए, जहां से रेलवे को आमदनी होगी। वह अपना खर्च भी निकाल सकेगी और लोन भी चुकाएगी। जहां हमें लगता है कि निवेश का फायदा नहीं होगा, वहां हम खर्च नहीं करते, भले ही कोई आलोचना ही क्यों न करे।




Q. पहले माल ढुलाई और अब एसी क्लास के किराए में लगातार बढ़ोतरी। हाल ही में फ्लेक्सी फेयर भी आपने लागू किया है। क्या अब यात्री किरायों में संशोधन का कोई विचार है?

यात्री किराए बढ़ाने का कोई प्रस्ताव हमारे पास विचाराधीन नहीं है। हालांकि कई सुझाव आते रहते हैं। फ्लेक्सी फेयर में हमने कुछ बदलाव किए हैं। मसलन, चार्ट बनने के बाद खाली रह गई सीटों पर छूट या फिर जिन रास्तों पर पैसेंजर कम हों, वहां भी हम चुनिंदा ट्रेनों में किरायों में कमी पर विचार करेंगे। आपको और बता दूं, हम सीटें बढ़ाने की कोशिश में जुटे हैं। हमने अतिरिक्त ट्रेनें चलाकर लगभग 37 करोड़ सीटों के मुकाबले पैसिंजरों को 50 करोड़ सीटें उपलब्ध कराने में कामयाबी हासिल की है। जहां तक कमाई की बात है तो हम दो लाख टीवी स्क्रीन रेलवे स्टेशनों पर लगाने जा रहे हैं। उन पर यात्रियों को सूचनाओं के साथ विज्ञापन दिखाए जाएंगे। इसी से हमें काफी पैसा मिलेगा। हमने इसी वजह से नॉन फेयर रेवेन्यू के जरिए 10 हजार करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई है।

Q. क्या रेलवे बोर्ड के ढांचे में बदलाव की जरूरत है?

हमने रेलवे के कॉरपोरेट की तरह गोल यानी लक्ष्य साफ कर दिए हैं। हमारी कोशिश है कि रेलवे सिर्फ दिल्ली में बैठे बोर्ड से न चले बल्कि डिविजन स्तर की यूनिट को मजबूत किया जाए, क्योंकि यात्रियों को वहीं से सुविधाएं मिलनी हैं और आमदनी भी उसी लेवल पर होनी है। ऐसे में हम अपना फोकस डिविजन स्तर पर करने जा रहे हैं। उसे बिजनेस यूनिट डिविजन के रूप में डेवलप करेंगे।

सुरेश प्रभु को रेलमंत्री की जिम्मेदारी देने के बाद बड़े पैमाने पर निवेश के लिए न सिर्फ घोषणाएं हुई हैं बल्कि रेल बजट को आम बजट में समाहित करने जैसे बड़े फैसले भी लिए गए हैं। कुछ जगह रेलवे के नए प्रोजेक्ट भी शुरू हुए हैं और स्वच्छता को लेकर रेलवे में अभियान भी चले। इसके बावजूद रेलवे को लेकर यात्रियों की शिकायतें बरकरार हैं। ट्रेन का टिकट न मिलने से लेकर ट्रेनों की लेट लतीफी की शिकायतें लगातार बनी हुई हैं। आशंका है कि रेल किराए बढ़ाए जा सकते हैं। ऐसे तमाम मुद्दों पर रेलमंत्री सुरेश प्रभु से बात की गुलशन राय खत्री ने।

suresh prabhu interview

Category: Indian Railways, News

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