Mission Speed of Indian Railways – Many hiccups still remains to be surpassed

| June 11, 2017

दोगुना गुना हो चुका है वीआईपी ट्रेनों का किराया, 40 साल पुरानी रफ्तार से चल रही हैं ट्रेनें

नई दिल्ली अर¨वद सिंहफ्लेक्सी फेयर के तहत दोगुना किराया देने और रेल मंत्री सुरेश प्रभु के तमाम दावों के बावजूद राजधानी-शताब्दी जैसी वीआईपी ट्रेनें वर्ष 2020 तक भी 90 किलोमीटर की औसत रफ्तार से अधिक तेज नहीं दौड़ पाएंगी। रेल मंत्रलय के अधिकारियों ने बताया कि देश के दो प्रमुख रेल मार्गो, दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई पर राजधानी-शताब्दी ट्रेनों को सेमी हाई स्पीड (200 किलोमीटर प्रति घंटा) से दौड़ाने के लिए 17 हजार करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।








इस बजट से पुराने ट्रैक बदलकर नए किए जाएंगे। सिग्नल प्रणाली को आधुनिक बनाया जाएगा। जानकारों के अनुसार, दोनों रेल मार्गो को सेमी हाई स्पीड बनाने के बावजूद जब तक मालगाड़ियां हटाई नहीं जाएंगी, तब तक ट्रेनों की रफ्तार नहीं बढ़ेगी। रेल मंत्रलय के वरिष्ठ अधिकारी मानते हैं कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) दिसंबर 2019 में पूरा होने की उम्मीद है।




तभी दिल्ली-हावड़ा, दिल्ली-मुंबई रूट पर चलने वाली मालगाड़ियां हटाई जा सकेंगी। इसके बाद ट्रेनों की औसत रफ्तार बढ़ जाएगी और राजधानी-शताब्दी सेमी हाई स्पीड से चल सकेंगी।




रेलवे बोर्ड ने 11 जून 1970 को दिल्ली मुंबई, दिल्ली-हावड़ा, दिल्ली-चेन्नई और हावड़ा-मुंबई को ट्रंक रूट घोषित किया था। इसमें स्प्ष्ट कहा गया कि उक्त रूट के ट्रैक अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन दौड़ने के लिए अनुकूल हैं। दो दशक से रेलवे के पास हाई स्पीड इंजन, आधुनिक कोच व मजबूत ट्रैक हैं। दिल्ली-आगरा (गतिमान) को छोड़कर आज तक किसी भी रूट पर ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम रफ्तार नहीं छू पाई हैं।

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Source:- Hindustan

Category: Indian Railways, News

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