Know how you can save maximum Income Tax during FY 2017-18

| June 10, 2017

बजट 2017: वित्त वर्ष 2017-18 में ऐसे बचा सकते हैं टैक्स

income tax

नई दिल्ली:- कहा जाता है कि दुनिया में मौत और टैक्स के सिवा कुछ भी निश्चित नहीं है। यानी, टैक्स से बचा नहीं जा सकता। हालांकि, इसे कम तो किया जा सकता है। बस थोड़ा चौकन्ना रहने की जरूरत है और चौकन्ना रहने के लिए जरूरी है- नियमों को अच्छी तरह समझकर उस पर अमल करना। तो चलिए जानते हैं, वित्त वर्ष 2017-18 में कहां और कैसे टैक्स बच सकता है यह कम हो सकता है…









1. 2.5 लाख से 5 लाख रुपये की कुल आमदनी पर टैक्स की दर 10 प्रतिशत से आधी होकर अब 5 प्रतिशत हो गई है। इससे हर साल आपका 12,500 रुपये तक का टैक्स बचेगा। जिनकी सालाना आमदनी 1 करोड़ रुपये से ज्यादा है उन्हें टैक्स पर 14,806 रुपये (सरचार्ज और सेस मिलाकर) की बचत होगी।

2. 3.5 लाख रुपये (पहले 5 लाख रु.) तक की सालाना आय पर टैक्स छूट पहले के 5,000 रुपये से अब 2,500 रुपये रह गई। टैक्स दर और टैक्स छूट में बदलाव का साझा असर यह हुआ कि पहले के 5,150 रुपये की जगह अब महज 2,575 रुपये ही टैक्स के रूप में चुकाने होंगे।

3. 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये की सालाना आमदनी वाले धनी करदाताओं को टैक्स पर 10 प्रतिशत की दर से सरचार्ज देना होगा। वहीं, 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की सालाना इनकम वाले महाधनी टैक्स पेयर्स को टैक्स पर अब भी 15 प्रतिशत का सरचार्ज देना होगा।

4. अचल संपत्ति की दीर्घावधि होल्डिंग पीरियड को 3 साल से 2 साल कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि जिस अचल संपत्ति पर आपका 2 साल से कब्जा है, उस पर अब 20 प्रतिशत की कम दर से टैक्स देना होगा। साथ ही, रीइन्वेस्टमेंट पर कई तरह की छूट भी मिलेंगी।

5. टैक्स पेयर्स के हित में हुए सुधारों की वजह से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स की राशि भी कम होगी। लागत सूचीकरण (महंगाई का समायोजन) के आधार वर्ष को 1 अप्रैल 1981 से 1 अप्रैल 2001 कर दिया गया है। इससे बिक्री पर कम फायदा होगा।




6. कैपिटल गेंस के रीइन्वेस्टमेंट पर टैक्स छूट (NHAI और REC बॉन्ड्स के अलावा) नोटिफाइड रीडिमेबल बॉन्ड्स में उपलब्ध होगा।

7. 5 लाख रुपये तक की सालाना टैक्स योग्य आय वाले व्यक्तिगत करदाताओं के लिए सिर्फ एक पन्ने का आसान सा टैक्स रिटर्न फॉर्म आएगा। इसमें कारोबार से आमदनी शामिल नहीं है। इस कैटिगरी में पहली बार रिटर्न्स फाइल करने वाले सामान्यतः जांच के दायरे में नहीं आएंगे।

8. 2017-18 के लिए टैक्स रिटर्न फाइल करने में देरी से जुर्माना देना होगा। इसके तहत, 31 दिसंबर 2018 तक रिटर्न फाइल करने वालों को 5,000 रुपये जबकि 31 दिसंबर, 2018 के बाद रिटर्न फाइल करने वालों को 10,000 रुपये का जुर्माना देना होगा। हालांकि, 5 लाख रुपये तक की आय वाले छोटे करदाताओं के लिए जुर्माने की राशि 1,000 रुपये से ज्यादा नहीं होगी।



9. लिस्टेड इक्विटी शेयरों या राजीव गांधी इक्विटी सेविंग्स स्कीम के तहत ओरिएंटेड इक्विटी की लिस्टेड यूनिट्स में पहली बार निवेश करने वालों को मिल रही छूट वित्त वर्ष 2017-18 से समाप्त हो जाएगी। लेकिन, इस स्कीम के तहत जो कोई भी 1 अप्रैल 2017 से पहले क्लेम कर देगा, वह अगले दो साल तक छूट पाने का अधिकारी होगा।

10. अब टैक्स रिटर्न का रिविजन पीरियड भी 2 साल के बदले 1 साल हो गया है। यानी, अब आप इनकम टैक्स रिटर्न का रिविजन चाहते हैं तो संबंधित वित्त वर्ष के आखिर के या अससेमेंट पूरी होने के 1 साल के अंदर यह मांग करनी होगी। इनमें पहले आने वाला विकल्प ही मान्य होगा।

Source:- NBT

Category: Finance Ministry, News

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