Railway to launch smart locomotives to achieve zero accident target

| June 3, 2017

नई दिल्ली:- भारतीय रेल के स्मार्ट इंजन रेल यात्रियों के सफर को सुरक्षित बनाएंगे। तकनीक की मदद से यह पटरियों और अपनी सेहत का ध्यान रखेंगे। ड्राइवरों की चूक से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में भी सक्षम होंगे।रेल मंत्रलय ने हादसों को रोकने के लिए ट्रेन इंजनों में वीडियो एवं वॉयस रिकॉर्डिग एवं मॉनिटरिंग सिस्टम (एलसीवीआर) लगाने का फैसला किया है। इस सिस्टम से वीडियो कैमरों, माइक्रोफोन व वीडियो रिकॉर्डर को इंजन के केबिन में लगाया जाएगा। एक दर्जन इंजन हो रहे तैयार:








वाराणसी स्थिति डीजल रेल कारखाने जुलाई माह से इस तकनीक को सभी इंजनों में लगाएगा। पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर प्रथम चरण में एक दर्जन स्मार्ट इंजन तैयार किए जा रहे हैं।रैमलॉट लगाई गई : स्मार्ट इंजन में दूसरी विशेषता यह है कि सूचना प्रौद्योगिकी आधारित एक समग्र ट्रेन प्रबंधन प्रणाली (रैमलॉट) लगाई गई है। इसमें लोकोमोटिव एंड ट्रेन मैनेजमेंट सिस्टम (एलटीएमएस) व लोकोमोटिव रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम दो तकनीक काम करती है। रैमलॉट में दो सिम कार्ड होंगे। जोकि सीधे रेलवे के केंद्रीय सर्वर कंट्रोल से जुड़े होंगे। इससे इंजन का रियल टाइम डाटा व लोकेशन की निगरानी संभव होगी। इतना ही नहीं इंजन में खराबी की आशंका पर सिस्टम पहले अलर्ट कर देगा।




रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि भारतीय रेल को दुर्घटना मुक्त बनाने की राह पर काम हो रहा है। नई तकनीक की मदद से मानवीय चूक से होने वाली दुर्घटनाएं शून्य स्तर पर लगाना है।

रेल मंत्रलय ने ट्रैक फ्रेक्चर से होने वाले हादसों को रोकने के लिए सोनार तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला जनवरी 2017 में ले लिया था। इंजनों केबिन में लगने वाली इस तकनीक की मदद से चलती ट्रेन में ट्रैक फ्रेक्चर की निगरानी संभव होगी। इसका पता चलते ही इंजन इमरजेंसी ब्रेक लग देगा।




अधिकारियों ने बताया कि लेजर के माध्यम से इंजन में लगे डिवाइस में ट्रैक फ्रेक्चर से जुड़े डाटा जमा होते रहेंगे। ट्रेनों में इस तकनीक का इस्तेमाल करने में रक्षा मंत्रलाय ने मदद कर रहा है। नई तकनीक में आवाज के साथ ट्रैक पर करंट भी दौड़ता है। इसमें बाधा उत्पन्न होते ही आगे खतरे का पता चल जाता है।

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Category: Indian Railways, News

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