What precautions you must take before buying home

| June 1, 2017

एक परिवार की महीने की आय का बड़ा हिस्सा मकान की मद में चला जाता है और बचत के लिए रकम कम रह जाती है। संकेत धानोरकर बता रहे हैं कि इस फंदे से कैसे बचा जा सकता है…

मकान बुनियादी जरूरत है, लेकिन इसी मद में आप अपनी इनकम का एक बड़ा हिस्सा खर्च कर रहे हों तो आपको फिक्रमंद हो जाना चाहिए। होम लोन ईएमआई की बड़ी रकम आपको ऐसी स्थिति में पहुंचा सकती है, जिसमें आपके पास रहने के लिए एक महंगा मकान तो होगा, लेकिन ईएमआई चुकाने के बाद दूसरे खर्चों के लिए बहुत कम पैसा बचेगा। हम आपको यहां बता रहे हैं कि मकान और दूसरी अहम चीजों के बीच किस तरह संतुलन साधा जा सकता है।







घर खरीदने वक्त बरतें सावधानी
परिवारों के बजट के अस्तव्यस्त हो जाने का एक बड़ा कारण मकानों का पजेशन मिलने में होने वाली देर है। ईएमआई और किराए का दोहरा बोझ काफी महंगा साबित हो सकता है। मुंबई के बिजनसमैन चिंतन वालिया (33) को यह बात बेहतर ढंग से पता है। वालिया ने साल 2009 में 35 लाख रुपये का एक फ्लैट बुक किया था। बिल्डर जानामाना था, लिहाजा वालिया को भरोसा था कि प्रॉपर्टी का दाम चढ़ेगा और वह कुछ साल बाद मकान बेचकर अच्छा पैसा बना लेंगे। हालांकि अभी तक उन्हें पजेशन ही नहीं मिला है। वालिया अब शादीशुदा हैं और पैरंट भी बन चुके हैं। अब वालिया की इनकम का एक ठीकठाक हिस्सा होम लोन रीपेमेंट और रेंट में जा रहा है।

वालिया कहते हैं, ‘यह लागत चुभती है। घरेलू खर्च का इंतजाम करने के बाद बचत के लिए काफी कम पैसा रह जाता है।’ वालिया की स्थिति कोई अनोखी नहीं है। हजारों ऐसे लोग इसी नाव पर सवार हैं। घर खरीदने के लिए एक बड़ा फाइनैंशल कमिटमेंट करने वाले कई भारतीयों के गले में यह कदम बोझ की तरह लटक चुका है। जिन्हें पजेशन मिल गया है, उन्हें भी होम लोन चुकाने में दिक्कत हो रही है। ऐसे लोगों के पास 60-70 लाख रुपये के मकान हैं, लेकिन ईएमआई चुकाने के बाद दूसरे खर्चों के लिए उनके पास बहुत कम रकम बच रही है।

अक्सर ऐसा होता है कि सुरक्षा के झूठे अहसास में आकर कई होम बायर्स मकान खरीदने के साथ जुड़े दूसरे खर्चों को ध्यान में रखे बिना एक बड़ा फाइनैंशल कमिटमेंट कर बैठते हैं। होम लोन ईएमआई तो इस लागत का एक ही हिस्सा है। सोसायटी मेंटेनेंस चार्जेज, होम इंश्योरेंस प्रीमियम, साज-सज्जा की लागत और प्रॉपर्टी टैक्स को मिलाकर देखें तो घरेलू बजट पर बड़ा बोझ आता है। इनकी अदायदी के बाद कई लोगों के पास कम रकम बचती है और उन्हें फिर अहम फाइनैंशल टारगेट्स के मामले में समझौता करना पड़ता है।




आने वाले दिनों पर रखें नजर
होम लोन इंट्रेस्ट रेट्स कई साल के निचले स्तरों पर दिख रही हैं और ऐसे तमाम विज्ञापन दिख रहे हैं, जिनमें लोगों को मकान खरीदने के न्योते दिए जा रहे हैं। लेंडर्स और हाउसिंग डिवेलपर्स एक स्वर में कह रहे हैं, ‘यह मकान खरीदने का सबसे अच्छा समय है।’ इस लुभावने नारे को नजरंदाज करना आसान नहीं है। एक बड़ा सरकारी बैंक 8.4 पर्सेंट के इंट्रेस्ट रेट पर होम लोन ऑफर कर रहा है। ऐसे में 50 लाख रुपये का लोन अगर 20 साल के लिए लिया जाए तो ईएमआई 43075 रुपये बनती है। इंट्रेस्ट रेट 10 पर्सेंट होती तो ईएमआई 48251 रुपये बनती।

हालांकि कम ईएमआई की इस पिक्चर के पीछे दूसरी तस्वीरें भी हैं। मैजिकब्रिक्स में कंटेट ऐंड रिसर्च हेड जयश्री कुरुप ने कहा, ‘जो अभी कम इंट्रेस्ट रेट है, वह होम लोन के पूरे टेनर पर तो लागू होगी नहीं। जब रेट्स में बढ़ोतरी का रुझान बनेगा तो आपका लेंडर भी ब्याज दरें बढ़ाएगा।’ इसके अलावा कम मॉर्गेज रेट्स से यह तथ्य पूरी तरह छिप जाता है कि घरों के दाम हमेशा ही औसत होम बायर के बजट से बाहर रहते हैं।

अक्सर ऐसा होता है कि होम बायर्स आने वाले वर्षों में अपनी इनकम में एक तय बढ़ोतरी का अनुमान लगा बैठते हैं या यह अनुमान लगाते हैं कि उनके मकान का दाम आने वाले वर्षों कितना बढ़ जाएगा। इस आधार पर वे ज्यादा लोन ले बैठते हैं, भले ही तात्कालिक परिस्थितियां ज्यादा लोन लेने की गवाही न दे रही हों। मुंबई के ऋतेश ब्रह्मभट्ट (34) को आज ज्यादा होम लोन दर्द दे रहा है, लेकिन वह भविष्य में अपनी आमदनी बढ़ने की उम्मीद पर दांव लगा रहे हैं। अपनी पत्नी के साथ मिलकर ब्रह्मभट्ट अभी दो हाउसिंग लोन पर कुल 72000 रुपये ईएमआई के रूप में चुका रहे हैं।




उन्होंने अपना पहला मकान नौ साल पहले 25 लाख रुपये में खरीदा था, लेकिन फिर उन्होंने कुछ साल पहले अपने वर्कप्लेस के लिए करीब 74 लाख रुपये में एक अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट लेने का निर्णय किया। इस दंपती की मंथली इनकम करीब 1.50 लाख रुपये है। घरेलू मासिक खर्च करीब 30000 रुपये है। प्रॉपर्टी टैक्स और इंश्योरेंस प्रीमियम जैसे दूसरे सालाना कमिटमेंट्स 25000 रुपये के आसपास हैं। इसके बाद बचत के लिए उनके पास कम रकम ही बचती है। हालांकि ब्रह्मभट्ट की दलील है कि उन्हें अभी ज्यादा पेमेंट से तकलीफ तो हो रही है, लेकिन उनकी उम्र भी अभी कम ही है और समय के साथ वह इस मुश्किल से पार पा जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘मैंने एक चांस लिया और कम उम्र में ही एसेट्स हासिल करने का निर्णय किया, जो भविष्य में मुझे सिक्योरिटी कवर दे सकें।’ उन्हें यह भी भरोसा है कि जब भी जरूरत होगी, वह अपना एक मकान अच्छी कीमत पर बेच सकेंगे।

हालांकि होम बायर्स को इतना ज्यादा आत्मविश्वास भी नहीं पालना चाहिए कि जब भी जरूरत होगी वे अपनी प्रॉपर्टी अच्छे दाम पर बेच लेंगे। प्रॉपर्टी बेचना हंसी खेल नहीं है। बायर तलाशने और अपनी एसेट की अच्छी वैल्यू हासिल करने में काफी वक्त लग जाता है। हाउसिंग मार्केट का मौजूदा हाल इसकी एक बानगी है। नोटबंदी के बाद सेकंडरी या रीसेल मार्केट को तगड़ा झटका लगा है। मकान की खरीद को इन्वेस्टमेंट के रूप में देखने वाले वालिया जैसे कई होम बायर्स फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं।

मकानों की बिक्री में सुस्ती दिख रही है। होम डिवेलपर्स को नकदी की तंगी का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते कई डिवेलपर्स बीच में ही प्रॉजेक्ट्स से किनारा करने लगे हैं। कुरुप ने कहा, ‘प्रॉजेक्ट्स पूरा होने में देरी के जोखिम ने निवेशकों के लिहाज से इस बाजार की जान निकाल दी है। होम बायर्स के लिए अच्छा यही होगा कि वे अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉजेक्ट के बजाय पूरे हो चुके प्रॉजेक्ट्स पर गौर करें।’

रियल एस्टेट (रेग्युलेशन ऐंड डिवेलपमेंट) ऐक्ट से होम बायर्स को बेहतर सुरक्षा मिलने की उम्मीद की तो जा रही है, लेकिन इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि विभिन्न राज्यों में इसे किस तरह लागू किया जाएगा। इसक अलावा पिछले कुछ वर्षों में मकानों के दाम काफी चढ़े हैं, लेकिन ऐसे दौर भी आ सकते हैं या इलाके हो सकते हैं, जिनमें मकानों के दाम जस के तस रह जाएं या उनमें गिरावट आ जाए।

फिर यह बात भी है कि महंगे मकान का मालिक होने और दूसरे खर्चों के लिए मुश्किल होने जैसी स्थिति में कोई रातोंरात नहीं फंसता है। यह सब व्यक्ति की स्थिति बदलने के साथ धीरे-धीरे होता है। हो सकता है कि कोई अभी ज्यादा ईएमआई चुकाने में सक्षम हो, लेकिन अगर हालात बदल गए तो वह फंस भी सकता है। उदाहरण के लिए, अगर पति-पत्नी में से किसी एक की नौकरी लंबे समय के लिए छूट जाए तो क्या होगा? विभिन्न सेक्टरों में अभी छंटनी का जो दौर दिख रहा है, उसे चेतावनी के संकेत के रूप में लिया जाना चाहिए।

सैलरीड क्लास को कम इंक्रीमेंट्स का सामना भी करना पड़ रहा है। प्लानरूपी इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के फाउंडर अमोल जोशी ने कहा, ‘घर खरीदने का निर्णय मौजूदा इनकम के आधार पर करना चाहिए, न कि भविष्य में इसमें हो सकने वाली बढ़ोतरी के आधार पर।’ इसी तरह अगर एक पार्टनर बच्चों के जन्म के बाद घर में ही रहने का फैसला करे तो आज के मुकाबले बाद में हाउसिंग पेमेंट्स कहीं ज्यादा बड़ा बोझ बन जाएगा।

किराये पर रहना पैसे की बर्बादी नहीं
कई बार लोग ऐसा घर खरीद लेते हैं, जिसे वे अफोर्ड नहीं कर सकते। ऐसे लोग यह दलील देते हैं कि किराये पर रहना पैसे की बर्बादी है। जानकारों का कहना है कि संभावित होम बायर्स के लिए महंगा घर खरीदने के बजाय रेंट पर रहने में समझदारी है। लैडर 7 फाइनैंशल सर्विसेज के फाउंडर सुरेश सदगोपन ने बताया, ‘सिर्फ रेंट बचाने के लिए घर खरीदने वाले कई लोग आज मुश्किल में हैं।’ उन्होंने कहा, ‘किराये पर रहते हुए अच्छे रिटर्न वाले प्रॉडक्ट्स में निवेश करना चाहिए, जिससे आप बाद में अपना घर आसानी से खरीद पाएं।’

घर खरीदने के लिए आप म्यूचुअल फंड में एसआईपी के जरिये बचत कर सकते हैं। इस तरह से पांच साल के बाद आपके पास अच्छा-खासा फंड जमा हो जाएगा। जिन शहरों में होम वैल्यू टु रेंटल वैल्यू रेशियो बहुत अधिक है, वहां किराये पर रहने में अक्लमंदी है। अर्थयंत्र बाय बनाम रेंट रिपोर्ट, 2017 के मुताबिक, मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नै में क्रमश: 25 लाख, 16 लाख, 12 लाख और 6 लाख रुपये से कम सालाना आमदनी वाले शख्स के लिए घर खरीदने के बजाय रेंट पर रहना समझदारी है।

कैश की किल्लत से बचिए
इसके बावजूद अगर आप घर खरीदना ही चाहते हैं और ईएमआई के तौर पर बड़ी रकम हर महीने खर्च करने पर आमादा हैं तो प्लानर्स का कहना है कि कुछ चीजें आपको शुरू में ही कर लेनी चाहिए। पहली, 6 महीने की ईएमआई के बराबर एक आपातकालीन फंड बनाइए। अगर आपके नॉर्मल कैश फ्लो पर असर पड़ता है तो आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इस पैसे को लिक्विड फंड में डाल दीजिए। यह आपकी कैश फ्लो सिचुएशन के बेहतर होने तक बफर का काम करेगा।

घर खरीदने से पहले आपको लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी भी लेनी चाहिए। होम लोन देने वाले उसके साथ इंश्योरेंस कवर भी देते हैं, लेकिन वे इसे चुनने के लिए आप पर दबाव नहीं डाल सकते। इसके बजाय आपको अलग से टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी लेनी चाहिए। अधिकतर होम लोन इंश्योरेंस प्लान रेड्यूसिंग कवर के साथ आते हैं। इसमें कवर की रकम आपके बकाया लोन अमाउंट से जुड़ी होती है। इसलिए जैसे-जैसे आप लोन चुकाते हैं, सम अश्योर्ड में कमी आती है। दूसरी तरफ, टर्म प्लान में सम अश्योर्ड तय होता है। चाहे जब भी क्लेम किया जाए, इसमें पूरी रकम मिलती है।

ऐसे में कर्ज लेने वाले का परिवार लोन की बकाया रकम चुकाने के लिए टर्म इंश्योरेंस से मिले पैसे का इस्तेमाल कर सकता है। क्रेडिट सुधार के को-फाउंडर अरुण राममूर्ति का कहना है कि होम बायर्स को टर्म इंश्योरेंस के साथ एक जॉब लॉस इंश्योरेंस पॉलिसी भी लेनी चाहिए। उन्होंने बताया, ‘अगर आप जॉब लॉस की वजह से कुछ समय तक होम लोन की किस्त देने पर सवालिया निशान लगता है, तो जॉब लॉस इंश्योरेंस पॉलिसी इसमें मददगार साबित होती है।’

अगर किसी ने कई लोन ले रखे हैं तो नौकरी जाने पर उसके लिए उनकी किस्त चुकाना नामुमकिन हो जाता है। 28 साल के निर्देश जैन का मामला लीजिए। वह पुणे के चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। 21,000 रुपये की होम लोन ईएमआई के साथ जैन 10,000 रुपये की कार लोन ईएमआई और 5,000 रुपये की पर्सनल लोन ईएमआई भी चुका रहे हैं। उनकी मंथली इनकम 60,000 रुपये है और इसमें से 36,000 रुपये वह हर महीने ईएमआई के तौर पर चुका रहे हैं। ऐसे बॉरोअर्स को अलग-अलग लोन को सिंगल लोन में बदलना चाहिए।

यह काम बैलेंस ट्रांसफर के जरिये हो सकता है। परनामी का कहना है कि इससे कुछ राहत मिल सकती है। उन्होंने बताया, ‘हाई कॉस्ट लोन को लोअर कॉस्ट लोन में बदलने से लोन की प्रिंसिपल वैल्यू कई साल में एमॉर्टाइज्ड हो जाएगी। इससे ओवरऑल ईएमआई का बोझ कम होगा और कैश फ्लो में सुधार आएगा।’ अगर आपने एक बड़ी रकम होम लोन के तौर पर ली हुई है, जिस पर अधिक ब्याज दर चुकानी पड़ रही है तो आपको उसे कम इंट्रेस्ट रेट वाले लोन में बदलना चाहिए। खासतौर पर हाल में होम लोन रेट्स में आई कमी को देखते हुए ऐसा करना फायदेमंद हो सकता है। एक सामान्य रूल के मुताबिक, अगर आप मार्केट रेट से होम लोन पर 1 पर्सेंट से अधिक ब्याज चुका रहे हैं तो आपको लोन री-फाइनेंसिंग के बारे में सोचना चाहिए।

घर कब बेचना है, इसे समझिए
एकदम बुरी हालत में घर खरीदने वाले को उसे बेच देना चाहिए। अगर आप हाउसिंग रिलेटेड पेमेंट्स की वजह से मुश्किल में हैं तो घर को बेचने के बारे में सोचिए और छोटे अफोर्डेबल होम में शिफ्ट हो जाइए। अगर आप लोन की ईएमआई चुकाने के लिए आमदनी नहीं बढ़ा सकते तो आपको उस देनदारी से मुक्ति पा लेनी चाहिए। राममूर्ति ने कहा, ‘अगर आपके सभी ऑप्शंस खत्म हो गए हैं और आपको रोजमर्रा की जरूरत पूरी करने में मुश्किल आ रही है तो आपके लिए घर बेचना बेहतर रहेगा।’

बड़ा हमेशा बेहतर नहीं होता
आपको जितने स्पेस की जरूरत है, उतना बड़ा घर ही खरीदिए। जोशी ने बताया, ‘कई लोग अपनी जरूरत से बड़ा मकान खरीद लेते हैं।’ कई लोग ऐसा घर खरीदने पर जोर देते हैं जो 15-20 साल बाद भी उनकी जरूरत पूरी करे। वह परिवार के बड़े होने की उम्मीद की वजह से ऐसा करते हैं। इसलिए भले ही आज उन्हें 1 बीएचके घर की जरूरत है, वे 2 या 3 बीएचके घर खरीदते हैं। इससे उन पर कर्ज का बोझ बढ़ जाता है। इसलिए घर खरीदने पर पहले अपनी जरूरत को समझना चाहिए। बड़ा घर खरीदने के लिए अधिक लोन लेना ठीक नहीं है।

कुरुप ने कहा, ‘आज की जरूरत के हिसाब से घर खरीदिए। आप आगे चलकर जरूरत पड़ने पर बड़ा घर ले सकते हैं। इससे आप पर बेवजह का दबाव नहीं बनेगा।’ अगर आप बड़ा या अच्छी लोकेशन पर घर खरीदते हैं तो इससे ना सिर्फ आपको ज्यादा कीमत देनी पड़ेगी बल्कि इससे घर संबंधी खर्च भी बढ़ेंगे, जो एक लाइफ स्टाइल मेंटेन करने के लिए जरूरी है। ज्यादातर एक्सपर्ट्स का कहना है कि होम लोन ईएमआई आपकी मंथली इनकम के 40 पर्सेंट से अधिक नहीं होनी चाहिए। अगर आप इससे ज्यादा पैसा ईएमआई पर खर्च कर रहे हैं तो आप गलती कर रहे हैं। हाउसिंग कॉस्ट के तौर पर अगर आप कम आमदनी खर्च कर रहे हैं तो जिंदगी में किसी मुसीबत के आने या अचानक दूसरी जरूरत आने पर आप कैश फ्लो की मदद से उससे पार पा सकते हैं।

इसके लिए मंथली खर्च तय करते वक्त प्रॉपर्टी, वॉटर टैक्स, होम इंश्योरेंस, मेंटेनेंस चार्ज का भी ख्याल रखना जरूरी है। वहीं, टैक्स बेनेफिट के लिए भी बड़ा घर खरीदना समझदारी नहीं है। होम लोन से टैक्सेबल इनकम में काफी कमी आती है और कई बार आप लोअर टैक्स स्लैब में भी जा सकते हैं, लेकिन यह छूट सिर्फ बने हुए घरों पर ही मिलती है। अंडर-कंस्ट्रक्शन घरों पर टैक्स छूट बहुत कम मिलती है।

साथ ही, हाल में टैक्स रूल्स में जो बदलाव हुए हैं, उनके चलते दूसरा घर खरीदने में समझदारी नहीं रह गई है। होम लोन के इंट्रेस्ट पेमेंट पर आप अधिकतम 2 लाख रुपये पर ही टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। पहले पूरे ब्याज पर यह छूट मिलती थी। इस बारे में एस्सेल फाइनैंस वेल्थ जोन के ईडी और सीईओ ब्रिजेश परनामी ने कहा, ‘घर खरीदने का फैसला सिर्फ टैक्स बेनेफिट्स के आधार पर नहीं लिया जाना चाहिए।’

Source:- NBT

Category: News

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