Indian Railways facing critical situation due to shortage of staff

| May 21, 2017

रेलवे में स्टाफ कम, रेलकर्मी 16-16 घंटे कर रहे काम, आराम नहीं

 railway locomotives

रेलवे के रनिंग स्टाफ के कर्मचारियों को अब पूरे 16 घंटे का आराम दिए जाने के आदेश रेलवे बोर्ड ने जारी कर दिए हैं। कर्मचारियों को यह राहत करीब 35 साल के संघर्ष के बाद मिली है। रेलवे के इस फरमान के बाद एक तरफ कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। कर्मचारियों को इस फैसले के बाद व्यक्तिगत जीवन और कार्यशैली में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है और रेलवे की सुरक्षा में भी इजाफे के कयास लगाए जा रहे हैं। मौजूदा समय में प्रबंधन के सामने कर्मचारियों की कमी आड़े आ रही है। लिहाजा कर्मचारी अभी भी पूरी तरह इस फरमान का फायदा नहीं ले पा रहे हैं।

पहले यह थी व्यवस्था








रेलवे में अभी तक लोको पायलट, सहायक पायलट एवं गार्ड को 8 घंटे से कम ड्यूटी होने पर मुख्यालय पर केवल 12 घंटे का रेस्ट मिलता था। कर्मचारी द्वारा 8 या इससे अधिक घंटे तक ट्रेन का संचालन करने पर 16 घंटे आराम करने के लिए वक्त दिया जाता था। 12 घंटे की विश्राम अवधि के कारण कई बार कर्मचारी को सप्ताह में लगातार 4 रात भी ड्यूटी करना पड़ जाता था। गार्ड यूएन सिन्हा के अनुसार इससे कर्मचारी के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता था। वहीं कर्मचारी मानसिक थकावट के दौर से भी गुजरते थे। इन 12 घंटों में औसत 8 घंटे केवल नींद पूरी करने में ही बीत जाते थे, जबकि बचे हुए 4 में से 2 घंटे अगली ड्यूटी की तैयारी में बीत जाते थे। इससे भी कर्मचारी पारिवारिक और सामाजिक दायित्व पूरे करने से चूक जाते थे।

कर्मचािरयों को अब मिली राहत




रेलवे के इस शेड्यूल से त्रस्त कर्मचारी लंबे समय से बदलाव की मांग कर रहे थे। रेलवे बोर्ड ने हाल ही में कर्मचारियों की यह मांग पूरी कर दी। जानकारी के अनुसार 30 दिसंबर 2016 से नया शेड्यूल लागू कर दिया है। इसके तहत अब रनिंग स्टाफ के कर्मचारियों को ड्यूटी के घंटे गिने बिना 16 घंटे का हेडक्वार्टर रेस्ट दिए जाने का आदेश पारित किया है। अब कर्मचारियों को कम घंटे ड्यूटी करने के बाद भी औसत 24 में से 16 घंटे आराम दिया जाएगा। लोको पायलट सतीश मीणा, बनवारीलाल सहित अन्य के अनुसार यह रेलवे का एहतियातन बेहतर फैसला है। कर्मचारी जब पूरी तरह आराम करेंगे तो रेलवे की सुरक्षा अपने आप ही बढ़ने लगेगी और दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

कर्मचारियों की है कमी




नागपुर रेलवे मंडल में इस फरमान से करीब 1 हजार से ज्यादा और अकेले आमला जंक्शन के करीब 300 से ज्यादा रेल कर्मियों को फायदा मिलेगा। मौजूदा समय में फरमान को प्रभावी ढंग से लागू करने रेल प्रबंधन परेशानी महसूस कर रहा है। इसकी वजह स्टाफ की कमी होना है। दरअसल रेलवे में लंबे समय से 12 घंटे में स्टाफ को बुक करने से कम स्टाफ की जरूरत पड़ रही थी, लेकिन रेलवे बोर्ड के नए आदेश के बाद रनिंग स्टाफ के अधिक कर्मचारियों की जरूरत होगी। लिहाजा अब इन्हीं कर्मचारियों से काम लेकर इन्हें ओवर टाईम देने की नौबत आ रही है।

एक दिन का आवधिक विश्राम अब भी शेष

सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के सचिव आरके वर्मा के अनुसार पिछले कई साल से रनिंग स्टाफ के कर्मचारी सप्ताह में एक दिन के आवधिक विश्राम की मांग कर रहे हैं। यानी यह विश्राम 46 घंटे का दिए जाने की मांग की जा रही है, लेकिन वर्तमान में यह केवल 30 घंटे का दिया जा रहा है। लिहाजा कर्मचारी अब इस मांग को लेकर भी प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।

Category: Indian Railways, News

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