7th Pay Commission – Military leadership is also busy fighting with rumours on pay commission

| May 10, 2017

वेतन पर अफवाहों से लड़ रही मिलिट्री लीडरशिप

Let Gen Bipin Rawat, the Army Commander of Southern Command during the Field Training Exercise 2016 where in teams from 17 armies participating at the Aundh Military Station during the inauguration ceremony on Wednesday morning. Humanitarian Mine Action and Peacekeeping Operations will the two focus issues of the exercise. Express Photo by Arul Horizon. 02.03.2016. Pune.

विसंगतियों को पूरी तरह दूर किए बिना सेनाओं में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के फैसले पर किसी भ्रम के कारण नाराजगी न हो, इसका ध्यान रखते हुए सैन्य नेतृत्व ने स्थिति साफ करने की मुहिम चला रखी है। गौरतलब है कि सोशल मीडिया में नये वेतनमान की अलग-अलग तरह से व्याख्या चल रही है।

सूत्रों के मुताबिक, आर्मी चीफ ने हाल में पुणे में सैनिकों और पूर्व सैनिकों से कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद सिविलियनों के मुकाबले हमारे स्टेटस में कोई कमी नहीं की गई है। सभी अफसरों को मिलिट्री सर्विस पे मिलाकर जो ग्रॉस सैलरी बन रही है, वह डायरेक्टर लेवल की सैलरी से ज्यादा है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि स्टेटस में कोई कमी न हो। छठे वेतन आयोग ने जो स्टेटस तय किया था वह सातवें वेतन आयोग ने भी कायम रखा है। हमें इन अफवाहों से निपटना होगा कि नॉन फंक्शनल अपग्रेड (NFU ) संगठन या इसकी नीतियों या पदों के क्रम के मुताबिक नहीं है।

गौरतलब है कि NFU के तहत एक बैच के अफसरों को निश्चित अवधि के बाद उस बैच के सबसे सीनियर अफसर के बराबर सैलरी और ग्रेड पे दिए जाने की सुविधा है। NFU को लेकर शिकायत यह थी कि छठे वेतन आयोग के दौरान सिविल सर्विस के लगभग सभी ग्रुप ए अफसरों को यह दिया गया, लेकिन मिलिट्री को नहीं। इसके बाद से सेना में सिविलियनों की बराबरी के लिए एकमुश्त NFU दिए जाने की मांग हो रही है।

सेना के टॉप अधिकारी भी यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि मिलिट्री सर्विस पे के जरिये हमें सिविलियन अफसरों से आगे रखा गया है। चूंकि सुरक्षा बल विशिष्ट परिस्थितियों में काम करते हैं, उनका जीवन कठिन होता है इसीलिए उन्हें अलग से मिलिट्री सर्विस पे दिया जाता है।

Category: News, Seventh Pay Commission

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