7th Pay Commission – Report on allowances may bring worries for Central Gov Employees

| February 27, 2017

modi-jaitley

7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) की रिपोर्ट को लागू हुए कई महीने बीत गए हैं. कर्मचारी संघों की कई आपत्तियों के बाद सरकार ने समितियों का गठन चर्चा आरंभ की थी. इन समितियों को कर्मचारियों की समस्या का समाधान चार महीनों में करना था लेकिन अब तक सात महीने बीत चुके हैं. अब खबर है कि सरकार की ओर से बनाई कई तीन समितियों में से एक जिसके पास अलाउंस का मुद्दा भी था ने अपनी रिपोर्ट को अंतिम प्रारूप दे दिया है और जल्द ही यह समिति अपनी रिपोर्ट वित्तमंत्रालय को सौंप देगी. सूत्रों का कहना है कि यह रिपोर्ट 27 फरवरी के बाद सरकार को सौंपी जा सकती है.

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के कई विभागों के कर्मचारी इस बात से काफी नाराज चल रहे हैं कि सरकार की ओर से कर्मचारी की मांगों की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. साथ ही इन कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार कर्मचारियों के साथ टालमटोल का रवैया अपना रही है. जिस रिपोर्ट को सरकार को चार महीने में दे दिया जाना चाहिए था वह रिपोर्ट अभी तक नहीं तैयार है. कर्मचारी इस बात से भी नाराज हैं कि उन्हें लगता है कि सरकार कर्मचारियों को भत्ता देने में भी जानबूझकर देरी कर रही है. केंद्रीय कर्मचारियों का मानना है कि बढ़ा हुआ भत्ता देने से सरकारी खजाने पर कुछ अतिरिक्त बोझ आएगा इसलिए सरकार इन मामलों में देरी कर रही है.

कई कर्मचारी संघों के नेताओं का कहना है कि सरकार ने सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के विवादित मुद्दों पर चर्चा के लिए कई समितियों का गठन कर दिया है. इन समितियों ने वेतन आयोग की रिपोर्ट पर चर्चाएं की , लेकिन अभी तक कुछ भी सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है. अभी तक इन समितियों से एक भी ऐसा निर्णय सामने नहीं आया है जिससे केंद्रीय कर्मचारी संतुष्ट हों.

अब केंद्रीय कर्मचारियों को यह भी आशंका सता रही है कि जिस अलाउंस को सरकार को पिछले साल जुलाई माह से दिया जाना चाहिए था अब वह नए साल में मिलेंगे तो कर्मचारियों को पिछले कई महीनों का बढ़े हुए अलाउंस के न मिलने  से काफी नुकसान होगा. कर्मचारियों की मांग है कि सरकार जब भी बढ़ा हुआ अलाउंस कर्मचारियों को दे वह 25 जुलाई 2016 से लागू होना चाहिए.

सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय में यह रिपोर्ट एक दो दिन में सरकार को दे दी जाएगी और यह भी सूत्रों ने बताया कि सरकार इसके रिपोर्ट के आधार पर 1 अप्रैल 2017 को नोटिफाई कर सकती है.  कर्मचारी नेताओं का कहना है कि अगर सरकार ने बढ़े हुए अलाउंस को लागू करने की तारीख 01.01.2016 नहीं रखी तो वह इसके लिए आंदोलन की राह पकड़ने को मजबूर होंगे.

एनसीजेसीएम के संयोजक और रेलवे कर्मचारी संघ के नेता शिवगोपाल मिश्रा ने एनडीटीवी को बताया कि अभी मुद्दों पर बातचीत पुरी नहीं हुई है. यह बात अलग है कि बातचीत आखिरी दौर में चल रही है. 22 फरवरी को मामले पर फिर सरकार के प्रतिनिधि और कर्मचारियों के प्रतिनिधियों में बातचीत होगी. अलाउंस को लेकर ही 22 फरवरी की मीटिंग है. इसमें एचआरए सबसे प्रमुख मुद्दा है. इसके अलावा न्यूनतम वेतनमान और पेंशन को लेकर भी बातचीत हो गई है.

जानकारी के लिए बता दें कि कर्मचारियों का आरोप है कि नरेंद्र मोदी ने रेलवे और डिफेंस कर्मचारियों पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दिया है. इन कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने अपने कर्मचारियों के हितों का बिल्कुल भी ख्याल नहीं रखा है. इसके विरोध में कर्मचारी संघों ने 16 मार्च 2017 को हड़ताल का ऐलान किया है. कर्मचारी संघ इस बात से भी नाराज़ हैं कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर कर्मचारियों के ऐतराज को भी सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया है और सात महीने बीत जाने के बाद कोई हल नहीं निकाला है.

Category: News, Seventh Pay Commission

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