One Year of Modi Government – What Railway has achieved in one year?

| May 23, 2015

One Year of Modi Government – What Railway has achieved in one year?

नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का पहला साल अगले हफ्ते पूरा होने जा रहा है। उससे ठीक पहले आईबीएनखबर ने अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों से उनके क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों, खामियों पर बात की। इसी सिलसिले में पढ़िए केंद्र सरकार के रेलवे के मोर्चे पर प्रदर्शन के बारे में रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य (ट्रैफिक) वी के अग्निहोत्री की राय।
ट्रेनों की लेटलतीफी में कितना सुधार आया?: भारत में ट्रेनों की लेटलतीफी की मुख्य वजह पटरियों पर ज्यादा भार होना है। हमारे यहां पटरियां क्षमता से 140 फीसदी तक इस्तेमाल की जा रही हैं जबकि मैनेजमेंट का नियम कहता है कि क्षमता का अधिकतम 70 फीसदी ही इस्तेमाल किया जा सकता है। रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने इस बात को ध्यान में रखते हुए ही किसी नई ट्रेन की घोषणा करने की जगह पटरियों की मरम्मत, दोहरीकरण, तिहरेकरण और चार लाइन का करने पर जोर दिया है। रेल बजट में किसी नई ट्रेन की घोषणा न होना बड़ी खासियत रही। लेकिन विपक्ष ने अच्छे-बुरे सभी कामों में सरकार को घेरे रखा है। सरकार की इच्छाएं बहुत अच्छी हैं। कोशिश बहुत अच्छी है लेकिन लोकसभा का बहुमत भी उन्हें पार नहीं लगा पा रहा।

सुरेश प्रभु के आने से कितना फर्क पड़ा?: सुरेश प्रभु ने दो काम बहुत अच्छे किए। पहला, अपनी सभी शक्तियों/अधिकारों को डिप्टीमिनिस्टर को दे दिया, कुछ ब्यूरोक्रेट्स को दे दिए। इसका फायदा ये हुआ कि छोटीमोटी फाइलों, टेंडरों में उन्हें उलझना नहीं पड़ता। इसकाफायदा नए तरीके के कामों को करने की आजादी के तौर पर मिला। वे नए तरीके के निवेश पर जुटे हैं। मोदी जी विदेश से निवेश ला रहे हैं,उसके लिए प्रभु काफी कोशिश कर रहे हैं कि किस तरह से निवेश हो। उन्होंने रेलवे में निवेश के कई तरीके निकाले हैं, अब विपक्ष कितनाकाम करने देगा, ये तो समय ही बताएगा।

ट्रेनों में भीड़भाड़, गंदगी कब दूर होगी?: ट्रेनों में जो भीड़भाड़ होती है, गंदगी होती है। उसे दूर करने का यही उपाय है कि आप रेलवे मेंसुधार करिए। स्पीड, क्षमता बढ़ाइए। उसके लिए पैसा लगेगा। अभी रेलवे के पास पैसा है नहीं। मुझे लगता है कि सबको रेलवे का श्वेत पत्रपढ़ना चाहिए। उसमें काफी बातें हैं। दरअसल, निवेश आएगा, तभी तो क्षमताएं बढ़ेंगी। अगर श्वेत पत्र के हिसाब से काम होंगे तो रेलवे काकायाकल्प हो जाएगा।

रेलवे को लेकर मोदी सरकार का अप्रोच कैसा रहा?: मुझे तो पीएम मोदी का वो बयान ही बेहद दृढ़ लगता है, जो उन्होंने रेलवे श्वेत पत्र कोपेश करते हुए दिया था। पीएम मोदी ने कहा था कि भारत में शायद रेलवे और डाकघर अपने गहन नेटवर्क वाले अकेले ऐसे दो बड़े संस्थानहैं, जो देश का कायाकल्प कर सकते हैं। उन्होंने कहा था कि वो रेलवे को सिर्फ परिवहन व्यवस्था ही नहीं, बल्कि देश के आर्थिक विकासकी रीढ़ की हड्डी के तौर पर देखना चाहते हैं। जो मोदी सरकार के इरादों को जाहिर कर देता है।

न्यूनतम किराया 5 रुपये और प्लेटफॉर्म टिकट 10 रुपयेकहां चूक हुई?: मुझे लगता है यहां चूक हो गई। तार्किक रूप से गलत है ये। वैसेअबतक मैं जितने देशों में गया हूं, वहां यात्रा टिकट के बिना प्लेटफॉर्म पर जाने ही नहीं दिया जाता। ये भारत में ही है कि 1 आदमी कोछोड़ने 10 लोग आते हैं। इसपर रोक लगनी चाहिए। इसमें बदलाव की जरूरत है। प्लेटफॉर्म टिकट का सिस्टम खत्म कर लोगों को बाहरही रोकना चाहिए।

Source IBN 7

Category: Indian Railways, News

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