इनकम टैक्स रिटर्न भरना बेहद आसान बनाएं ये स्टेप्स

| July 20, 2014

इनकम टैक्स रिटर्न भरना बेहद आसान बनाएं ये स्टेप्स

tax

फाइनैंशल इयर 2013-14 के लिए रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है। आखिरी दिनों की भीड़भाड़ से बचने के लिए बेहतर है कि यह काम अभी निबटा लिया जाए। सैलरीड क्लास के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने के तरीकों के बारे चार्टर्ड अकाउंटेंट सत्येंद्र जैन से बातचीत कर पूरी जानकारी दे रहे हैं प्रभात गौड़:-
इनकम टैक्स रिटर्न
फाइनैंशल इयर के खत्म होने के बाद ऐसे हर शख्स को इनकम टैक्स विभाग में एक फॉर्म भरकर देना पड़ता है, जिसकी सालाना आमदनी टैक्सेबल होती है। इस फॉर्म में कोई शख्स बताता है कि पिछले फाइनैंशल इयर में उसे कुल कितनी आमदनी हुई और उसने कितना टैक्स जमा किया। इसे इनकम टैक्स रिटर्न कहा जाता है। फाइनैंशल इयर 31 मार्च को खत्म होता है। इन दिनों फाइनैंशल इयर 2013-2014 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरे जा रहे हैं। इस बार के लिए 2013-14 प्रीवियस इयर कहलाएगा और 2014-15 को असेसमेंट इयर कहेंगे। अभी जो रिटर्न भर रहे हैं, उसमें इनकम टैक्स के सभी स्लैब फाइनैंशल इयर 2013-14 के हिसाब से लिए जाएंगे, यानी पिछले दिनों आए बजट में जो नए बदलाव किए गए हैं, वे इस रिटर्न को भरते वक्त लागू नहीं होंगे।किसे भरना है

 फाइनैंशल इयर 2013-14 के स्लैब के हिसाब से छूट की सीमा यानी एग्जेंप्शन लिमिट इस वक्त 60 साल से कम के पुरुषों और महिलाओं के लिए 2 लाख रुपये है। 60 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों के लिए यह सीमा ढाई लाख रुपये है और 80 साल से ज्यादा उम्र के सुपर सीनियर सिटिजन के लिए 5 लाख तक की आमदनी टैक्स फ्री है।

 अगर इनवेस्टमेंट छूट लेने से पहले आपकी इनकम इस सीमा से ज्यादा है तो आपको रिटर्न भरना होगा यानी इनवेस्टमेंट पर मिलने वाली छूट के बाद अगर टैक्सेबल इनकम इस लिमिट से कम हो रही है तो रिटर्न भरना होगा। मान लीजिए आपकी ग्रॉस इनकम 2 लाख 50 हजार रुपये है। आपने 80 सी में पीपीएफ और इंश्योरेंस पॉलिसी में 60 हजार रुपये इनवेस्ट कर दिए। इससे आपकी टैक्सेबल इनकम हो गई 1 लाख 90 हजार रुपये। अब यह 2 लाख की एग्जेंप्शन लिमिट से कम है, लेकिन रिटर्न भरना होगा क्योंकि डिडक्शन से पहले की इनकम ढाई लाख थी।

 अगर ग्रॉस इनकम इस डिडक्शन से पहले ही एग्जेंप्शन लिमिट से कम है तो रिटर्न भरने की जरूरत नहीं है।

आखिरी तारीखें

31 जुलाई
 सैलरीड लोगों के लिए
 बिजनस करने वालों और प्रफेशनल लोगों के लिए अगर वे अपनी आमदनी की ऑडिटिंग नहीं कराते।

30 सितंबर
 उन लोगों, फर्मों और कंपनियों के लिए जिनके लिए अपनी आमदनी की ऑडिटिंग कराना जरूरी है।

31 मार्च 2015
 अगर आपका टीडीएस आपकी कंपनी ने काट लिया है और आप पर टैक्स की कोई देनदारी नहीं बनती तो आप 31 मार्च 2015 तक भी बिना किसी पेनल्टी के टैक्स रिटर्न भर सकते हैं।

टॉप 5 गलतियां

1. गलत फॉर्म का चयन
किसे कौन सा फॉर्म भरना है, इसके लिए बाकायदा नियम हैं। इस बारे में यहां भी विस्तार से बताया गया है। कई बार लोग गलत फॉर्म का चुनाव कर लेते हैं। अपनी कैटिगरी के हिसाब से सही रिटर्न फॉर्म चुनें और उसे ही भरें।

2. खाली फॉर्म पर साइन
जो लोग किसी एजेंट के जरिए रिटर्न भरते हैं, वे अक्सर खाली रिटर्न फॉर्म पर दस्तखत करके एजेंट को दे देते हैं। एजेंट बाद में उस फॉर्म को भरकर जमा कर देता है। खाली फॉर्म पर दस्तखत न करें। अगर फॉर्म भरने में एजेंट से जरा भी गलती हो गई तो आपको दिक्कत होगी। भरे हुए रिटर्न फॉर्म पर एक नजर डाल लेने के बाद ही उस पर साइन करें।

3. नंबरों पर ध्यान
रिटर्न फॉर्म में पैन, एमआईसीआर कोड, अकाउंट नंबर, एम्प्लॉयर का टैन जैसी कुछ फिगर्स ऐसी होती है जिन्हें भरते वक्त गलती होने की आशंका रहती है। इन नंबरों को ध्यान से भरें। फर्ज कीजिए अगर आपने अपने पैन की कोई एक डिजिट भी गलत भर दी, तो इनकम टैक्स विभाग आपके ऊपर जुर्माना लगा सकता है।

4. अकनॉलेजमेंट भेजने में भूल
जो लोग ई फाइलिंग कर रहे हैं, उनके लिए आईटीआर v का प्रिंट लेकर उसे बेंगलुरु भेजना जरूरी है। यह काम ऑनलाइन रिटर्न भरने के 120 दिन के भीतर किया जा सकता है, लेकिन कई बार लोग इस फॉर्म को भेजना भूल जाते हैं या फिर ऐसा भी होता है कि उसे कुरियर से इस फॉर्म को भेज देते हैं। नियम यह है कि इस फॉर्म को साधारण पोस्ट से या स्पीड पोस्ट से ही भेजा जाना चाहिए।

5. फॉर्म 16 न लेना
अगर आपने फाइनैंशल इयर के दौरान नौकरी बदली है तो अपने दोनों एम्प्लॉयर से फॉर्म 16 जरूर ले लें। अपने पहले एम्प्लॉयर के साथ काम के दौरान की गई सेविंग को अगर आपने अपने नए एम्प्लॉयर को नहीं बताया है तो हो सकता है आपको एक्स्ट्रा टैक्स भरना पड़े।

नया टैक्स कैलकुलेटर
सीबीडीटी ने इनकम टैक्स की ऐनुअल लायबिलिटी को कैलकुलेट करने के लिए नया ऑनलाइन टैक्स कैलकुलेटर लॉन्च किया है। टैक्सपेयर्स यह टैक्स कैलकुलेटर आईटी डिपार्टमेंट की ऑफिशियल वेबसाइट पर देख सकते हैं। नए टैक्स कैलकुलेटर पर जाना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें-law.incometaxindia.gov.in/DIT/Xtras/taxcalc.aspx

रिटर्न भरने के 3 स्टेप्स:

1. पता करें कौन सा फॉर्म भरना है

ITR1 (सहज)
ऐसे इंडिविजुअल इस फॉर्म को भरेंगे, जिन्हें नीचे दिए गए आइटम से आमदनी होती है :
 सैलरी या पेंशन से आमदनी होती है।
 एक प्रॉपर्टी से किराये की आमदनी होती है।
 ब्याज से आमदनी होती है।

न भरें अगर
 इनकम फ्रॉर्म अदर सोर्सेज में आपको लॉस हुआ है।
 पूरे फाइनैंशल इयर के दौरान टैक्स फ्री आमदनी 5000 रुपये से ज्यादा हो।
 विदेश में आपकी कोई जायदाद है।

ITR2
ऐसे इंडिविजुअल और एचयूएफ इस फॉर्म को भरेंगे जिन्हें नीचे दिए गए आइटम से आमदनी होती है :
 सैलरी या पेंशन से आमदनी होती है।
 एक से ज्यादा प्रॉपर्टी से किराये की आमदनी होती है।
 कैपिटल गेन हुआ हो।
 इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज में लॉटरी और रेसिंग से हुई आमदनी भी शामिल हो।

न भरें अगर
 टैक्स पेयर को बिजनस या प्रफेशन से आमदनी हुई है।

ITR3
फर्म्स में ऐसे पार्टनर जिन्हें नीचे दिए तरीकों से आमदनी होती है, वे आईटीआर 3 भरेंगे :
 ब्याज, सैलरी, बोनस से होने वाली आमदनी
 कैपिटल गेंस
 एक या एक से ज्यादा प्रॉपर्टी से होने वाली रेंटल इनकम

ITR4
जिन लोगों को नीचे दिए गए तरीकों से आमदनी होती है, उन्हें आईटीआर 4 भरना है :
 बिजनस
 प्रफेशन (डॉक्टर, वकील आदि)

ITR4s (सुगम)
यह फॉर्म ऐसे लोगों को भरना है, जिन्हें नीचे दिए तरीकों से आमदनी होती है :
 बिजनस जिसका टर्नओवर 1 करोड़ से कम हो।
 बिजनस प्रीजंप्टिव टैक्सेशन रूल्स के तहत कवर होता हो।

न भरें अगर
 आपको कैपिटल गेंस हुआ हो।
 लॉटरी या रेसिंग से आपको कोई आमदनी हुई हो।
 अगर आप सेल्फ एम्प्लॉयड प्रफेशनल जैसे डॉक्टर, वकील आदि हों।
 सेक्शन 44 ए (1) में दर्ज किसी प्रफेशन से इनकम हुई हो।

ITR5
 यह अकनॉलेजमेंट फॉर्म होता है, जिसका इस्तेमाल हर टैक्सपेयर को करना होगा।
 अगर मैन्युली रिटर्न भर रहे हैं तो इसे फॉर्म के साथ ही जमा करें।
 अगर ऑनलाइन रिटर्न भर रहे हैं, तो इस फॉर्म का प्रिंटआउट लेकर उस पर साइन करके साधारण डाक से इस पते पर भेज दें : सीपीसी,
 इनकम टैक्स के बेंगलुरु ऑफिस में यह फॉर्म पहुंच जाने के बाद ही रिटर्न का प्रॉसेस पूरा होगा।
पिछले साल सीबीडीटी ने यह नियम बनाया था कि जिन लोगों की सालाना एग्जेंप्ट इनकम 5 हजार रुपये से ज्यादा है, उन्हें आईटीआर 1 नहीं, आईटीआर 2 भरना होगा। पीपीएफ का ब्याज, डिविडेंड आदि को एग्जेंप्ट इनकम माना जाता है।

2. भरने की तैयारी
रिटर्न भरने से पहले नीचे दिए गए कागजात आपके पास होने चाहिए। हालांकि इन कागजात को रिटर्न के साथ लगाना नहीं है, लेकिन रिटर्न भरते वक्त इनकी जरूरत पड़ेगी।

फॉर्म 16
अगर आप कहीं नौकरी करते हैं तो यह फॉर्म अब तक आपके एम्प्लॉयर ने आपको दे दिया होगा। यह इस बात को साबित करता है कि एम्प्लॉयर ने आपकी सैलरी से टीडीएस काटा है।

टीडीएस सर्टिफिकेट
अगर सैलरी के अलावा किसी दूसरे स्रोतों से भी आपको आमदनी हुई हो और उस पर टीडीएस कट चुका हो तो उस संस्था से भी टीडीएस सर्टिफिकेट ले लें। यह बात हम रेंटल इनकम, शेयर, एफडी वगैरह से होने वाली इनकम के मामले में कह रहे हैं।

फॉर्म 26 एएस
फॉर्म 26 एएस से आप यह पता लगा सकते हैं कि कंपनी या बैंक ने आपका जो टीडीएस काटा है, उसे सरकार के पास जमा भी कराया है या नहीं। इससे यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि आपका काटा गया टीडीएस इनकम टैक्स विभाग के पास पहुंच गया है। इस टीडीएस का ब्योरा आप दो तरह से देख सकते हैं।

पहले incometaxindiaefiling.gov.in पर जाएं और view form 26 AS पर क्लिक करें। इनकम टैक्स की साइट पर रजिस्ट्रेशन कराने के बाद यह देख सकते हैं। अगर आप नेट बैंकिंग इस्तेमाल करते हैं तो बैंक की वेबसाइट पर जाकर view your tax credit पर क्लिक करके फॉर्म 26 एएस देख सकते हैं। यहां आपको उस बैंक में की गई एफडी आदि से जुड़ी जानकारी मिलेगी।

बैंक स्टेटमेंट्स
सभी सेविंग्स अकाउंट्स की साल भर (1 अप्रैल 2013 से 31 मार्च 2014 तक) की स्टेटमेंट ले लें। इसकी मदद से आपको यह पता चलेगा कि बैंक ब्याज के तौर पर आपको कितनी आमदनी हुई। ब्याज की इस आमदनी को आपको रिटर्न में दिखाना होगा।

अन्य दस्तावेज
पैन नंबर और बैंक की डिटेल्स आपके पास होनी चाहिए। बैंक का आईएफएससी नंबर रिटर्न में भरा जाता है। इसी से रिफंड का पैसा आपके अकाउंट में आता है।

3. भरने का तरीका
इनकम टैक्स रिटर्न दो तरह से भरा जाता है – मैन्युअली और ऑनलाइन। मैन्युली भरने के लिए फॉर्म या तो किसी स्टेशनरी की दुकान से लें या फिर साइट www.incometaxindia.gov.in से डाउनलोड कर लें। एक ऑप्शन तो यह है कि आप किसी सीए, वकील या इनकम टैक्स विभाग के टीआरपी को फीस देकर अपना फॉर्म भरवा लें। दूसरा तरीका यह है कि इसे खुद भर लें। खुद भरने का तरीका हम सामने वाले पेज पर दे रहे हैं। अगर आप टीआरपी की मदद से या ऑनलाइन भरना चाहते हैं तो यहां देखें :

A. TRP की मदद से
http://www.trpscheme.com पर जाएं। Locate TRP पर क्लिक करें। आपको गूगल मैप दिखेगा और उसके नीचे कुछ सूचनाएं मांगी जाएंगी। Name में कुछ न भरें। State और District के ऑॅप्शन भरने से आपके क्षेत्र के टीआरपी के नाम, पते और फोन नंबर आपको मिल जाएंगे। इनसे संपर्क करें। समय-समय पर इनकम टैक्स विभाग टीआरपी के बारे में अखबारों में भी सूचना देता रहता है। टोल फ्री नंबर 1800-10-23738 पर कॉल करके भी टीआरपी से संबंधित सूचनाएं हासिल की जा सकती हैं। यह लाइन सोमवार से शनिवार तक सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक खुली रहती है।

 कोई भी टीआरपी देश में कहीं भी मौजूद आदमी का रिटर्न भर सकता है। टीआरपी को पहचानने के लिए उनका आईडी कार्ड या सर्टिफिकेट देखें।

 टीआरपी को फॉर्म 16 की फोटोस्टैट दें, ऑरिजनल डॉक्यूमेंट न दें। इसकी मदद से वह रिटर्न भरेगा और जमा करेगा। रिटर्न जमा करने के बाद टीआरपी आपको उसकी रसीद देगा। रिटर्न भरने में कोई गड़बड़ी होती है तो इसके लिए टीआरपी जिम्मेदार होगा।

खर्च कितना : रिटर्न भरकर जमा करने के काम के लिए टीआरपी अधिकतम 250 रुपये तक चार्ज कर सकते हैं।

जमा कहां करें
सैलरीड क्लास के जो लोग ऑफलाइन रिटर्न भर रहे हैं, वे मयूर भवन, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली में अपने असेसमेंट ऑफिसर के पास रिटर्न जमा करा सकते हैं। असेसमेंट ऑफिसर के बारे में जानने के लिएincometaxindia.gov.in पर जाएं और पैन पर क्लिक करें। Know your AO code पर क्लिक करें। नर्ई खुली वेबसाइट पर पैन मांगा जाएगा। एंटर दबाएं और फिर पेज को लेफ्ट खिसकाएं। अब अपने आईटीओ वॉर्ड से संबंधित पूरी जानकारी आपके सामने होगी। लेकिन अगर आपने पिछले एक साल में नौकरी बदली है तो नए एम्प्लॉयर के हिसाब से वॉर्ड होगा। इस वेबसाइट पर जानकारी पिछले भरे रिटर्न के आधार पर होती है। वेबसाइट से यह पता लगाने में दिक्कत हो और नौकरी न बदली हो तो पिछले साल भरे गए रिटर्न की रसीद से भी आप अपना वॉर्ड पता लगा सकते हैं।

B. ऐसे भरें ऑॅनलाइन
रिटर्न ऑनलाइन भरना सबसे आसान और सही है। इससे रिफंड भी जल्दी आता है। ई-रिटर्न भरने के लिए टैक्स से संबंधित कई वेबसाइट्स हैं, लेकिन ये साइट्स आपसे पैसे चार्ज करती हैं। फ्री में ई-रिटर्न भरना चाहते हैं तो इनकम टैक्स विभाग की साइट से ई-रिटर्न भरना चाहिए। इसके लिए नीचे दिए गए स्टेप को फॉलो करें :
साइट incometaxindia.gov.in पर जाएं। continue पर क्लिक करें। वहां लेफ्ट साइड में ऑप्शन File Returns Online-Income Tax Return पर क्लिक करें।

राइट में डाउनलोड के नीचे AY 2014-15 मेन्यू में ITR1 पर क्लिक करें। आईटीआर 1 में Excel Utilityक्लिक करें। इस साल के लिए सहज फॉर्म आ जाएगा। अब डायलॉग बॉक्स में Save File ऑप्शन क्लिक करें। फॉर्म को डेस्कटॉप पर सेव कर लें।

अब इस फॉर्म को ऑफलाइन ही भर लें। बीच-बीच में फॉर्म को वैलिडेट करते जाएं। इससे अगर कहीं कुछ गड़बड़ होगी तो पकड़ में आ जाएगी। फॉर्म भर लेने के बाद Generate XML file पर क्लिक करके इसका एक्सएएमएल वर्जन तैयार कर लें।

अब इनकम टैक्स की साइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन कराएं और ई-मेल अकाउंट व पासवर्ड हासिल करें। इसके लिएincometaxefiling.gov.in पर जाएं। यहां register पर क्लिक करें। यहां आपसे पैन मांगा जाएगा। इसके बाद कुछ बेसिक सूचनाएं मांगकर आपका रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। यह बिल्कुल ऐसे ही है जैसे किसी भी साइट पर रजिस्ट्रेशन होता है।

इसकी मदद से लॉग-इन करें और Summit Return क्लिक कर दें। रिटर्न की एक्सएमएल फाइल ब्राउज करके उसे अपलोड कर दें। फाइल अपलोड हो जाने के बाद अकनॉलेजमेंट फॉर्म आएगा। अगर आपके पास डिजिटल साइन हैं, तो डिजिटल साइन दे दीजिए। रिटर्न का प्रॉसेस यहीं पूरा हो गया।

अगर आपके पास डिजिटल साइन नहीं हैं, तो इस अकनॉलेजमेंट फॉर्म का प्रिंट लेकर उस पर अपने साइन करें और 120 दिनों के अंदर इसे साधारण पोस्ट या स्पीड पोस्ट से इस पते पर भेज दें:
आईटी विभाग,
सीपीसी, पो. बॉ. 1,
इलेक्ट्रॉनिक सिटी पोस्ट ऑफिस,
बेंगलुरु-560100

इसके बाद इनकम टैक्स विभाग की तरफ से 15-20 दिन में इस बात का अकनॉलेजमेंट आपके पास ई-मेल से आएगा कि आपका रिटर्न भरने का काम सफलतापूर्वक पूरा हुआ। कई लोगों को लगता है कि साधारण पोस्ट से अगर फॉर्म बेंगलुरु नहीं पहुंचा तो? ऐसे में अगर 15 दिनों में रिटर्न का अकनॉलेजमेंट मेल न आए तो दोबारा अकनॉलेजमेंट भेज दें। आप बेंगलुरु ऑफिस के फोन नंबर 080-43456700 पर कॉल कर सकते हैं।

 अगर आपने पिछली बार ऑनलाइन रिटर्न भरा था तो इस बार भी ऑनलाइन ही भरें। ऐसा करना बहुत आसान है। आपको बस आमदनी के डिटेल्स भरने होंगे। बाकी सारे डिटेल्स खुद ब खुद आ जाएंगे।

खर्च कितना
अगर आप इनकम टैक्स की साइट से भर रहे हैं तो कोई खर्च नहीं है। किसी और साइट से भरते हैं तो 100 से 750 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। कुछ और पेड साइट्स : इन वेबसाइट्स की मदद से कुछ पैसे खर्च करके भी आप अपना रिटर्न फाइल कर सकते हैं।
Taxsmile.com

Myitreturn.com

Taxspanner.com

कुछ बदलाव
होम लोन पर एक्स्ट्रा छूट: आईटीआर 1 में इस बार सेक्शन 80 ईई में डिडक्शन क्लेम करने के लिए स्पेस दिया गया है। पहली बार घर खरीदने वालों को इस धारा के तहत डिडक्शन मिलता है। तो अगर 1 अप्रैल 2013 से 31 मार्च 2014 के बीच आपने होम लोन लिया है तो लोन के रीपेमेंट में ब्याज की रकम पर आप 1 लाख रुपये का एक्स्ट्रा डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। इसे क्लेम करने के लिए लोन की रकम 25 लाख से कम हो और मकान की कीमत 40 से कम हो।

एग्जेंप्ट अलाउंसेज: सेक्शन 10 में एग्जेंप्ट अलाउंसेज का डिटेल्स आपको इस बार देना होगा। आईटीआर 2 में एचआरए, एलटीए आदि के बारे में बताने के लिए स्पेस दिया गया है। पिछले साल तक ऐसे टैक्स एग्जेंप्ट अलाउंसेज की बस कुल रकम बतानी होती थी।

कैपिटल गेंस: कैपिटल गेंस पर आपको पूरी जानकारी देनी होगी। इस बार आईटीआर 2 में कैपिटल गेंस को कई कैटिगरी में बांटा गया है। ये कैटिगरी कैपिटल गेंस की प्रकृति के आधार पर बनाई गई हैं।

रिफंड्स: रिफंड अब आपको किसी भी सूरत में चेक से नहीं भेजा जाएगा। यह रकम सीधे आपके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर होगी।

80 C में मिलने वाले डिडक्शन
80 सी, 80 सीसीसी आैर 80 सीसीडी में इन आइटम में छूट मिलती है। इसकी सीमा फाइनैंशल इयर 2013-14 के लिए एक लाख रुपये है।
 पब्लिक प्रॉविडेंट फंड
 एंम्प्लॉयी प्रॉविडेंट फंड
 पांच साल की एफडी
 दो बच्चों की ट्यूशन फी
 सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम
 होम लोन के रीपेमेंट में प्रिंसिपल वाली रकम
 लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम
 एनएससी
 इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम यानी ईएलएसएस

इन आइटमों में भी छूट मिलती है, जो एक लाख की सीमा से अलग है।
 80 डी: हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम 15 हजार की सीमा तक।
 24 बी: होम लोन के रीपेमेंट में ब्याज की रकम पर। इसकी सीमा डेढ़ लाख रुपये है।
 80 ईई: फाइनैंशल इयर 2013-14 में अगर हाउस प्रॉपर्टी के लिए लोन लिया है, तो कुछ शर्तों के साथ इसके रीपेमेंट में ब्याज की रकम पर अधिकतम 1 लाख की छूट। यह छूट 24 बी की छूट से अलावा है।
 80 ई: हायर स्टडीज के लिए लिए गए एजुकेशन लोन के रीपेमेंट में ब्याज की रकम पर।
 80 जी: किसी संस्था को दी जाने वाली डोनेशन।

Category: Income Tax, News

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