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| January 23, 2014
पैसे की तत्काल जरूरत के लिए अगर आप होम इक्विटी लोन लेना चाहते हैं, तो कुछ बिंदुओं पर गौर करना बेहतर रहेगा। कम ब्याज दरों के आकर्षण में आप अपनी क्षमता से ज्यादा लोन भी ले सकते हैं। इसमें सावधानी नहीं बरती तो कर्ज के संकट में भी फंस सकते हैं।
क्या है होम इक्विटी लोन : यह लोन आपके मकान के बाजार मूल्य और पहले के बकाया लोन के अंतर के आधार पर दिया जाता है। चूंकि यह पहले से चल रहे लोन (जो प्रॉपर्टी खरीदते समय लेते हैं) के अतिरिक्त दिया जाता है इसलिए यह सेकंड मोर्गेज लोन के नाम से भी जाना जाता है। आप इसे रिफाइनेंसिंग लोन की तरह भी ले सकते हैं। प्रॉपर्टी के बढ़े बाजार मूल्य पर नया लोन लेकर पुराना लोन चुका सकते हैं।
यह लोन दो प्रकार का होता है1. फिक्स्ड रेट लोन और 2. लाइन ऑफ क्रे्रडिट लोन। फिक्स्ड रेट वाले लोन में मंजूर की गई एकमुश्त रकम पर ब्याज पूरी अवधि के लिए समान दर से लगता है। जबकि लाइन ऑफ के्रडिट लोन में दर परिवर्तनशील होती है। इसमें लोन की राशि जरूरत के मुताबिक हिस्सों में मिलती है। आप जब भी लोन अमाउंट लेते हैं तब होम लोन की मौजूदा दरों के अनुसार ब्याज लगता है।
एलिजिबिलिटी : 1 कोई भी होम लोन जिसमें पिछले एक साल के दौरान रिपेमेंट का रिकॉर्ड संतोषजनक रहा हो। मतलब किस्त बराबर अदा की गई हो। 2. कर्जदाता/बैंक के पक्ष में प्रॉपर्टी मार्गेज रखना पड़ती है।
विशेषताएं : रिपमेंट की अवधि मौजूदा लोन के साथ खत्म हो सकती है। ग्राहक चाहे तो पहले खत्म करने का विकल्प भी चुन सकता है। दोनों लोन की अवधि ग्राहक की 70 वर्ष उम्र पूरी होने से पहले खत्म हो जानी चाहिए। आमतौर पर अधिकतम दो होम इक्विटी लोन एक-साथ लिया जा सकता है। प्री-पेमेंट और प्रि-क्लोजर पेनाल्टी आमतौर पर नहीं लगती है। लोन अमाउंट की गणना मकान की मार्केट वैल्यू के 75 फीसदी और मौजूदा लोन की बकाया रकम में अंतर के आधार पर की जाती है। विभिन्न बैंकों में इसकी अधिकतम और न्यूनतम सीमा अलग-अलग है।
ब्याज की लागत : विभिन्न बैंकों के नियमों के मुताबिक ब्याज दर में कुछ फर्क आ सकता है। पता करें कि किस बैंक से लोन सस्ता पड़ेगा और आपकी जरूरत के मुताबिक होगा। आमतौर पर बैंक इस लोन पर सेल्फ ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी के लोन की तुलना में कुछ अधिक दर से ब्याज वसूलते हैं। लेकिन पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड की तुलना में यह लोन सस्ता पड़ता है। लंबी अवधि के लोन में आपको कुल ब्याज अधिक देना पड़ सकता है। इसलिए लोन की अवधि कम से कम रखें।
अन्य छिपी लागत : प्रोसेसिंग फीस के रूप में बैंक मौजूदा ब्याज दर और 12.36 फीसदी सर्विस चार्ज लेते हैं। सर्च/टाइटल डीड्स के वेरिफिकेशन के लिए एडवोकेट फी लगती है। संपत्ति के मौजूदा बाजार मूल्य के निर्धारण के लिए वेल्यूएशन रिपोर्ट फीस लगती है। लोन एग्रीमेंट और मोर्गेज डॉक्‍यूमेंट्स पर स्टाम्प ड्यूटी देनी होती है। मोर्गेज रखी जाने वाली संपत्ति का बैंक इंश्योरेंस भी कराते हैं। इसका प्रीमियम भी देना पड़ता है। बैंक लोन अकाउंट मेंटेन करने के लिए सालाना मैंटेनेंस चार्ज और लोन अमाउंट निकालने पर ट्रांजेक्शन फीस लगा सकते हैं।
ध्यान रखने वाली बातें  
– जहां तक संभव हो होम इक्विटी लोन लेने से बचें। खर्चों में कटौती करें। बचत का इस्तेमाल अतिरिक्त खर्चों की पूर्ति में करें।
– लोन नियत समय में नहीं चुकाया तो संपत्ति से हाथ भी धोना पड़ सकता है।
– ब्याज की लागत बढऩे के लिए पैसे की व्यवस्था करके रखें।
– यदि लंबी अवधि में ब्याज दर बढ़ी तो आपको अधिक किस्त चुकानी पड़ सकती है और दूसरे खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है।
Source: DB

Category: Banking, Home Loans

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